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ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी चलती रही, मरीज बजाता रहा पियानो और पढ़ा हनुमान चलीसा

भोपाल। अमूनन जब किसी मरीज का आपरेशन चल रहा होता है तो उसके तीमारदार बाहर बैठकर प्रार्थना कर सलामती की दुआ करते हैं, लेकिन यहां खुद मरीज ही आपरेशन के दौरान पांच घंटे हनुमान चालीसा पढ़ते हुए प्यानो और मंजीरा बजाता रहा। मामला एम्स का है, जहां बिहार के बक्सर जिले के 28 वर्षीय युवक की ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी हो रही थी। दरसअल, युवक को कई महीनों से दौरे पड़ रहे थे। डॉक्टरों ने उसे बिना बेहोश किए ब्रेन की सर्जरी कराने की सलाह दी तो वह घबरा गया। हालांकि काफी सुझाव के बाद मान गए।ऑपरेशन के दौरान उन्हें लोकल एनेस्थीसिया दिया गया, जिससे शारीरिक असहजता या दर्द महसूस न हो।

सर्जरी के दौरान मरीज पियानो बजा रहा था

डाक्टर के अनुसार, मरीज बार-बार दौरे पड़ने की समस्या लेकर न्यूरोसर्जरी ओपीडी में आया था। उसे तत्काल भर्ती कर लिया गया। प्रो. डा. अमित अग्रवाल, डा. आदेश श्रीवास्तव, डा. सुमित राज और डा. प्रदीप चौकसे ने अवेक क्रैनियोटामी के जरिए सर्जरी करने का निर्णय लिया। सर्जरी के दौरान मरीज होश में था। इस दौरान वह हनुमान चालीसा का पाठ तो पियानो और मंजीरा बजा रहा था। उससे बात भी हो रही थी। वह हिल-डुल भी रहा था। सर्जरी के बाद मरीज के ब्रेन से ट्यूमर को बाहर निकाला गया। इस आपरेशन में एनेस्थीसिया टीम की महत्वपूर्ण भूमिका में डा आशुतोष कौशल और डा. अनुपमा शामिल थे।

इसलिए पियानो, मंजीरा बजाया और हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ा

डाक्टर ने बताया कि यह इसलिए किया गया ताकि सर्जरी के दौरान ब्रेन का वह हिस्सा जो आवाज और शरीर की गतिविधि को नियंत्रित करता है, डैमेज न हो। हमने ध्यान से आपरेशन किया, जो सफल रहा। आपरेशन करीब पांच घंटे तक चला। 25 अक्टूबर को सुबह नौ बजे शुरू हुआ ऑपरेशन दोपहर करीब दो बजे तक चला। अब मरीज ठीक है।

अवेक क्रैनियोटॉमी के जरिए की गई सर्जरी

मरीज को पिछले तीन महीने से मिर्गी के दौरे पड़ रहे थे। इसके बाद डाक्टरों ने उसकी बायोप्सी की। इसमें सामने आया कि उन्हें ब्रेन ट्यूमर है। भोपाल एम्स के डाक्टर सर्जरी के लिए राजी हो गए और दावा किया जा रहा है कि यह यहां की ऐसी पहली सर्जरी है। इस टेक्निक को अवेक क्रैनियोटामी कहा जाता है।

अवेक क्रैनियोटामी एक इंट्राक्रानियल सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें घाव की मैपिंग और रीसेक्शन के लिए सर्जरी के दौरान मरीज को जानबूझकर जगाया जाता है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान यह प्रक्रिया काफी लोकप्रिय हुई और इसके परिणाम भी बेहतर आए हैं। भोपाल एम्स के डाक्टरों ने भी सफल सर्जरी की है।

डा. अजय सिंह, एम्स भोपाल

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