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इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री से संरक्षणवाद को छोड़कर उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया,पीयूष गोयल।

भारत को इलेक्ट्रिकल वस्तुओं का वन स्टॉप शॉप बनना चाहिए, सात वर्षों में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार निर्यात लक्ष्य: श्री गोयल।

भारत की इलेक्ट्रॉनिक गुड्स इंडस्ट्री को अधिक लचीली सप्लाई चेन, गुणवत्ता मानकों का अद्यतन करने और प्रतिस्पर्धी दरों पर दुनिया को उच्च गुणवत्ता वाले सामान व सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए। यह बात आज नई दिल्ली में इंडियन इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईईईएमए) की ओर से आयोजित ‘इलेक्रमा’ के 16वें संस्करण में मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने अपने संबोधन के दौरान कही। मंत्री ने प्रतिभागियों से विनिर्माण में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।

मंत्री ने इस विषय पर प्रकाश डाला कि उपभोक्ताओं को बेहतर सौदा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करके उपभोक्ताओं की देखभाल करना इंडस्ट्री की जिम्मेदारी है। उन्होंने मौजूद उद्योग जगत के नेताओं और प्रतिभागियों से संरक्षणवाद से दूर रहने और उद्योग, खासकर एमएसएमई क्षेत्र के हितों को संतुलित करने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। एक सीमा के बाद संरक्षणवाद उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। उन्होंने कहा कि ग्राहकों के साथ-साथ एमएसएमई क्षेत्र के हितों को संतुलित करना इंडस्ट्री की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

मंत्री गोयल ने बताया कि देश 2025 में इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का निर्यात मात्रा के आधार पर दूसरे पायदान पर है, जबकि 2015 में यह 167वें पायदान पर था। उन्होंने कहा कि जनवरी, 2025 में अकेले इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्यात मात्रा 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी। उन्होंने कहा कि भारत को इलेक्ट्रॉनिक गुड्स के लिए वन स्टॉप शॉप बनना चाहिए और इंडस्ट्री से अगले सात वर्षों में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार निर्यात लक्ष्य तक पहुंचने का लक्ष्य रखने का आग्रह किया।

मंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स इंडस्ट्री ने बीते दशक में अपने ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और संस्थापित क्षमता को दोगुना कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने देश में 1,800 वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) सेटअप करने में मदद की है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करना और देश में उत्पादित एसटीईएम स्नातकों की उच्च संख्या का लाभ उठाते हुए नवाचार को प्रोत्साहन देना है

विशेष अधिवेशन की विषयवस्तु ‘भारत – एक विश्व मित्र’ पर बोलते हुए, श्री गोयल ने कहा कि भारत राष्ट्र को एक परिवार के तौर पर देखने में गर्व महसूस करता है, जो दुनिया के सभी देशों के साथ एक दूसरे के साथ निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित साझेदारी में काम करना चाहता है। भारत विकसित दुनिया के साथ मजबूत स्थिति में जुड़ना चाहता है और उन्हें सस्ती कीमतों पर उच्च गुणवत्ता की वस्तुएं और सेवाएं प्रस्तुत करना चाहता है।

मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘सर्व फ्रॉम इंडिया’ जैसी विभिन्न पहलों के साथ ग्राहकों को स्थानीय उत्पाद खरीदने और व्यवसायों को वैश्विक स्तर पर जाने में योग्य बनाने के प्रयासों से देश के विकास में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था को बदलने, उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण और सेवाओं के प्रावधान, नीति निश्चितता और विकास की गति और पैमाने के लिए कार्यबल को प्रशिक्षित करने की सरकार की प्रतिबद्धताओं ने इस मील के पत्थर को जन्म दिया है”।

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