इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा हमारे संविधान में बताए गए ‘समान अवसर’ के आदर्श को पाने का सबसे असरदार ज़रिया है। उन्होंने कहा कि प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के बीच-बीच में पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर को बहुत कम करना शिक्षकों की कोशिशों से ही मुमकिन हो पाया है। उन्होंने इस राष्ट्रीय कामयाबी के लिए सभी शिक्षकों की तारीफ़ की।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्कूली शिक्षा ही शिक्षा व्यवस्था की नींव होती है। ज्ञान और हुनर तो कभी भी हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन बचपन में अच्छे व्यवहार की सीख देना कहीं ज़्यादा असरदार होता है। शुरुआती कक्षाओं में बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर पूरी लगन से ध्यान देकर, हमारे शिक्षक बेहतरीन छात्रों और ज़िम्मेदार नागरिकों की आने वाली पीढ़ी तैयार कर सकते हैं।
राष्ट्रपति ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कई छात्र आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों से आते हैं; कुछ अपने परिवार में पढ़ने वाले पहले व्यक्ति होते हैं; कुछ साधारण गाँव के स्कूलों से बड़े शहरों के स्कूलों में आते हैं; कुछ स्वभाव से शर्मीले होते हैं; कुछ में बहुत हुनर होता है लेकिन आत्मविश्वास की कमी होती है; और कुछ बच्चे विशेष ज़रूरतों वाले होते हैं। शिक्षकों की यह खास ज़िम्मेदारी है कि वे उनमें आत्मविश्वास जगाएँ और ऐसे सभी छात्रों को आगे बढ़ाएँ जो किसी भी वजह से खुद को कमतर महसूस करते हैं।
