Shubhash Chandra Case: 6.5 करोड़ में रफा-दफा हो गया सुभाष चंद्रा का 22 हजार करोड़ का कर्ज, बैंक झेलेंगे 99.9% का भारी नुकसान
नई दिल्ली: ज़ी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़े करीब ₹22,000 करोड़ के कर्ज को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कर्ज का निपटारा महज ₹6.5 करोड़ में किए जाने से बैंकों को लगभग 99.9% तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यह मामला कर्ज के निपटारे और बैंकों को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। ₹22,000 करोड़ की मूल राशि की तुलना में ₹6.5 करोड़ की रकम बेहद कम है।
₹22,000 करोड़ के मुकाबले सिर्फ ₹6.5 करोड़
अगर ₹22,000 करोड़ और ₹6.5 करोड़ की तुलना करें, तो ₹6.5 करोड़ कुल कर्ज का लगभग 0.03% बैठता है। यानी शेष करीब 99.97% राशि की तुलना में यह निपटान राशि बेहद छोटी है।
हालांकि, किसी भी वित्तीय मामले में वास्तविक नुकसान का आकलन केवल मूल कर्ज और निपटान राशि की तुलना से नहीं किया जा सकता। इसमें ब्याज, पहले की वसूली, परिसंपत्तियों की बिक्री और संबंधित समझौते जैसी परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।
बैंकों पर क्यों उठ रहे सवाल?
इतनी बड़ी कर्ज राशि के मुकाबले बेहद कम रकम में निपटारे की खबर सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था में कर्ज वसूली और समझौतों की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹22,000 करोड़ की पूरी राशि का वास्तविक नुकसान ₹21,993.5 करोड़ ही हुआ, ऐसा निष्कर्ष आधिकारिक दस्तावेजों और पूरी वित्तीय जानकारी के बिना नहीं निकाला जा सकता।
नोट: इस खबर में दिए गए आंकड़ों और “99.9% नुकसान” के दावे को प्रकाशित करने से पहले संबंधित बैंक, ऋणदाता संस्था या आधिकारिक दस्तावेज से सत्यापित करना जरूरी है।