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बड़े भाई के कहने पर जहर पीकर दी थी जान, आज भी शादी से पहले लाला हरदौल की समाधि पर जाती हैं लड़कियां, ये है कहानी

ओरछा, टीकमगढ़। वैसे तो हर गांव और जिलो में लाला हरदौल का मंदिर है। यही नहीं ओरछा मंदिर के बगल में ही लाला हरदौल की समाधि आज भी है। साथ ही वह जहर का प्याला भी है, जिसे लाला हरदौल ने अपनी मां समान भाभी की इज्जत बचाने के लिए अपनी ही भाभी के हाथों से जहर पी लिया था।

पीले चावल की मान्यता

आज भी बुंदेलखंड अंचल में यह मान्यता है कि शादी के अवसर पर बहिनें पीले चावल लेकर लाला हरदौल की समाधि पर लेकर पहुंचती है और विवाह में आने का निमंत्रण भी देती है। ऐसी भी किदंवती है कि लाला हरदौल विवाह में आते है, और विवाह का कामकाज भी पूरी तरह से संभालते है। जिनके आने मात्र से ही सारी की सारी व्यवस्थायें पूर्ण हो जाती है।

मुगलों से लड़ाई

इतिहासकार कहते हैं कि ओरछा के तत्कालीन राजा वीरसिंह जू देव के पुत्र लाला हरदौल थे और राजा ने अपने ज्येष्ठ पुत्र जुझार सिंह को ओरछा राज की राजगद्दी सौंप दी थी। साथ ही हरदौल को ओरछा का दीवान बना दिया था। राजगद्दी संभालने के बाद राजा जुझार सिंह अनेकों बार मुगलों ने लड़ाई करते रहे, जिसके चलते ओरछा की प्रजा का पूरा भार दीवान हरदौल पर ही थी।

भाभी के हाथ हरदौल ने पिया जहर

हरदौल के द्वारा राजकाज संभालने के चलते जुझार सिंह के सलाहकारों ने जुझार सिंह के कान भर दिए कि उनकी पत्नि चंपावती और हरदौल के मध्य अवैध संबंध है। जब यह बात राजा जुझार सिंह को पता चली, तो जुझार सिंह ने चंपावती को जहर से भरा प्याला दिया। यह आदेश दिया कि यह जहर अपने ही हाथों से लाला हरदौल को पिला दो। इतना सुनते ही चंपावती के पैरो से जमीन खिसक गई।

चूंकि जुझार सिंह की पत्नि चंपावती अपने देवर लाला हरदौल को अपने पुत्र के समान ही मानती थी, और उनके लिए यह काफी कष्टकारी भी था। और जव यह बात चंपावती ने अपने देवर लाला हरदौल को सुनाई तो लाला हरदौल ने अपनी मां समान भाभी के हाथों से अपनी भाभी की इज्जत बचाने के लिए जहर का प्याला हंसते-हंसते पी लिया।

फूलबाग में आज भी है वह प्याला जिससे पिया था जहर

ओरछा मंदिर के बगल में ही फूलबाग प्रांगण है, जहां पर लाला हरदौल की समाधि है। इसी समाधि के सामने ही वह कांसे का प्याला भी है, जिसमें लाला हरदौल ने अपनी ही भाभी के हाथों से जहर पी लिया था, अब यह कांसे का प्याला पाषाण का रूप ले चुका है। इस प्याले को चारों और से लोहे की जाली से कवर्ड किया गया है।

प्रतिदिन आते सैकड़ों लोग न्यौता देने

लाला हरदौल की समाधि पर आज भी सैकउ़ों लोग शादी विवाह के पूर्व पीले चावल लेकर महिलाएं और पुरूष आते है और उन्हें विवाह समारोह में आने का न्यौता देते है। ऐसी मान्यता है कि लाला हरदौल शादी विवाह में पहुंचते है और यहां पहुंचकर वह भण्डारे की व्यवस्था संभालते है, जिसके चलते किसी प्रकार की कोई कमी नहीं हाेती है तथा शादी विवाह र्निविवाद रूप से सम्पन्न होते है। आज भी यहां पूरे सम्मान के साथ लाला हरदौल के शयनकक्ष में सुबह-शाम आरती होती है, इतना ही नहीं लाला हरदौल की समाधि पर नवविवाहिता दंपत्ति भी हल्दी के हाथे लगाने के लिए आते है।

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