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मध्य प्रदेश में यहां स्थापित है 900 वर्ष पुरानी हनुमान प्रतिमा, अब तक नहीं मिल सका पैर का छोर

गंजबासाैदा। राम भक्त महाबली हनुमान की एक प्राचीन प्रतिमा भी शहर की सीमा से सटे ग्राम मुरादपुर में है जिससे द्वापर युग की कई किवदंती यहां भी जुड़ी हुई है। जानकार बताते हैं कि मुरादपुर स्थित महाबली हनुमान की विशाल प्रतिमा सवा नौ सौ साल पुरानी है इस प्रतिमा के पैर की थाह अंग्रेज भी नहीं ले सके। जमीन खोदकर तालाब बन गया, लेकिन पैर का छोर किसी को नहीं मिल पाया है। इसका प्रमाण मंदिर के सामने बना तालाब आज भी मौजूद है।

इस प्रतिमा को मुरादें पूरी करने वाली प्रतिमा भी कहा जाने लगा है। मुरादपुर में पवन पुत्र श्री हनुमान ज्योति पुंज के रुप में पीपल के विशाल वृक्ष से प्रकट हुए थे। तब से उसी स्थान पर विराजमान है। कालांतर के चलते पीपल का वृक्ष अब नहीं है। पूर्व यह प्रतिमा एक टीले पर थी। बाद में उसके आसपास चबूतरे का निमार्ण किया गया।

वेतबा व्रत पर्वोत्सव समिति के संस्थापक पंडित अरविंद अवस्थी बताते हैं कि द्वापर में इसी स्थान पर महाबली हनुमान ने पांडव पुत्र भीम का घमंड चूर किया था। पांडव पुत्र भीम अपने भाईयों के साथ वनवास का आखिरी एक साल अज्ञातवास काटने राजा विराट की नगरी में आए थे। इसका उल्लेख ग्रंथों में है। महाबली भीम के शरीर में एक हजार हाथियों के समान बल था। बल पाकर उनको घमंड आ गया था। भगवान श्रीकृष्ण ने महाबली भीम का घमंड तोड़ने के लिए श्री हनुमान को आज्ञा दी। इसी स्थान पर हनुमान ने भीम का घमंड तोड़ा था।

द्वापर युग में विराट राज्य में था मुरादपुर

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