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300 से ज्यादा फिल्मों में दिखाई दिया ये ‘Movie Tree’, 50 साल से डायरेक्टर्स की पसंद; अब हमारे बीच नहीं रहा

आंध्रप्रदेश के वेस्ट गोदावरी के तट पर स्थित एक पेड़ जिसे मूवी ट्री के नाम से भी जाना जाता है वह सोमवार को गिर गया है. इस पेड़ का इतिहास वैसे तो करीब डेढ़ सौ साल पुराना है लेकिन सबसे पहले यह 49 साल पहले एक मूवी में दिखाई दिया था. बस इस पेड़ की खूबसूरती फिल्म मेकर्स को कुछ इस कदर भा गई कि एक के बाद एक 300 मूवीज में इस पेड़ को दिखाया गया.

वेस्ट गोदावरी के कोव्वुरु मंडल में स्थित यह पेड़ अपने आप में किसी सुपरस्टार से कम नहीं है. इस पेड़ को स्थानीय लोग प्यार से सिनेमा चेट्टू कहते हैं. आपने सुना होगा कि गांव के किसी शख्स के बहुत महान काम करने पर उनके नाम पर गांव, शहर या रेलवे स्टेशन का नाम रखा जाता है तो ऐसा ही कुछ इस महान पेड़ के साथ हुआ है. इस पेड़ के पास बसे कुमारदेवम के लोगों का कहना है कि उनका शहर इस पेड़ के नाम से ज्यादा जाना जाता है. यह उनके लिए भी गर्व की बात है.

1975 में दिखा पहली बार

गोदावरी नदी पर विशाल शाखाओं के साथ फैले इस पेड़ की दीवानगी फिल्म मेकर्स में सिर्फ पर्दे पर ही दिखाने की नहीं थी. साउथ सिनेमा के कई डायरेक्टर इस पेड़ को बहुत शुभ मानते थे. साउथ सिनेमा में इस पेड़ की बहुत ख्याति फैली हुई है. 1975 में सबसे पहली बार पदिपंतलु मूवी में इस पेड़ को दिखाया गया था. उस जमाने से लेकर रंगस्थलम मूवी तक इस पेड़ की स्क्रीनिंग की गई है. गोदावरी के तट पर मौजूद इस पेड़ की खूबसूरत बरबस ही लोगों को अपनी तरफ खींच लेती थी.

कई डायरेक्टर्स का पसंदीदा

साउथ मूवीज के सुप्रसिद्ध डायरेक्टर वामसी, के विश्वनाथ, जंध्याला, बापू और राघवेंद्र राव जैसे डायरेक्टर्स के लिए येड़ पसंदीदा रहा है. डायरेक्टर वामसी तो अपने दोस्तों के साथ इस पेड़ के पास जाकर भोजन किया करते थे. शंकराभरणम, सीतारमैया गारी मनावरलु, त्रिशूलम, पद्मव्यूहम, मुगा मनासुलु जैसी मूवी में इस पेड़ पर कई सीन फिल्माए गए हैं. 150 साल पुराने इस पेड़ के गिरने से स्थानीय लोग तो दुखी हैं कि साथ ही साउथ सिनेमा में भी शोक की लहर है.

जमींदोज हुआ पेड़

इस पेड़ के जमींदोज होने की वजह से स्थानीय लोगों के बीच काफी शोक की लहर है. लोगों का कहना है कि यह पेड़ अपने अंदर कई कहानियों को समेटे हुए था. इसकी खूबसूरती देखकर अच्छे-अच्छे कायल हो जाते थे. इसकी छांव सहज ही लोगों की सुकून देती थी. अगर कोई इस पेड़ को हिला देता तो इसमें से फिल्मी जगत की कहानियां स्वतः की गिर जाती हैं. फिल्मी जगत के लोगों का यह भी मानना था कि इस पेड़ के पास अगर शूटिंग हुई है तो मूवी जरूर हिट होती थी. हालांकि अब इस पेड़ के पास शायद ही कोई शूटिंग होगी.

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