सुबह देखा गया था बाघ
बताया जाता है कि सुबह 7 बजे से ही गांव के पास बाघ दिखाई दिया था। इसके बाद बाघ गांव के अंदर आ गया था। बाघ के नजदीक होने से गांव के लोग दहशत में आ गए थे। पार्क अमला पटाखों की मदद से टाइगर को वन क्षेत्र से खदेड़ने का प्रयास कर रहा था। बाद में हाथी गश्ती दल को भी मौके पर रवाना कर दिया गया था। यहां जंगल घना होने के कारण बाघ पर लगातार नजर रख पाना भी संभव नहीं है।
यहां दिखा था बाघ
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघ दोपहर को ग्रामीण कंधा सिंह के तालाब पर लगे बरा के पेड़ के नीचे बैठा था। बाद में स्थानीय मंगोल सिंह और बद्री सिंह के घर के पास मौजूद लैंटाना में बैठ गया था। बताया जाता है कि देर शाम 5.30 बजे तक इस लैंटाना की ओट में खामोशी से टाइगर बैठा रहा। हालांकि पार्क टीम मौके पर मौजूद थी और किसी भी तरह टाइगर को वन क्षेत्र हांकने का प्रयास में जुटी रही।
बमेरा में पिछले महीने हुई घटना
कसेरू से चार किमी पर स्थित ग्राम बमेरा में पिछले महीने एक बाघ ने कम्मा सिंह के घर में घुसकर उस पर हमला कर दिया था जिससे उसकी मौत हो गई थी। बाद में उस बाघ को पकड़ लिया गया था और बहेरहा के बाड़े में डाल दिया गया था। इसके बाद घायल बाघ को मुकुंदपुर भेज दिया गया है। एक दिन पहले ही धमोखर रेंज के छयन गांव में भी एक आदिवासी सिपाही बैगा के घर में बाघ घुस गया था जिसे कुत्तों ने भोंककर भगा दिया था।
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