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करोड़ों का कारोबार संभाल रहे रायपुर के जितेंद्र दोशी पिता के बिजनेस को यूं पहुंचाया शिखर पर

रायपुर। अगर आप अपना काम कड़ी मेहनत, लगन और ईमानदारी के साथ करते है और कुछ कर दिखाने की सकारात्मक सोच के साथ ऐसे ही आगे बढ़ते है तो आपको अपने पूरे करने से कोई नहीं रोक सकता। ईश्वर भी हमेशा ऐसे लोगों के साथ खड़े रहता है। यह बातें अपने कारोबार के साथ ही समाज सेवा में अग्रणी रहने वाले कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र दोशी ने कहीं। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज कड़ी मेहनत और लगन के साथ आपकी सच्चाई होती है।

कारोबार में के साथ समाज के लिए भी कुछ करें

जितेंद्र दोशी का कहना है कि किसी भी चीज में सफलता के लिए आपको सकारात्मक होना बहुत जरूरी है। हम अपने अंदर की नकारात्मकता को भगाकर ही आगे बढ़ सकते है। इसी सोच के साथ ही वे व्यावसायिक संगठनों के साथ ही सामाजिक संगठनों से भी जुड़े है। हम सभी को चाहिए कि कारोबार में प्रगति के साथ ही अपने समाज के लिए भी कुछ करें। अपने इसी ध्येय को आधार मानते हुए वे समाज सेवा में भी लगे रहते है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने व्यापार में कदम रखा तब शीतल ग्रुप का टर्नओवर 50 लाख था और वर्तमान में शीतल ग्रुप का टर्नओवर 100 करोड़ पहुंच गया है।

शीतल एजेंसी से हुई शुरूआत

जितेंद्र दोशी ने बताया कि नर्ष 1986 में शीतल एजेंसी की शुरूआत हुई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और पैतृक कारोबार आलू-प्याज का होलसेल कारोबार को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान में आटोमोबाइल, रियल एस्टेट, कृषि के साथ ही होलसेल ट्रेड, वेट ब्रिज, ट्रांसपोर्टेशन, कंस्ट्रक्शन आदि सेक्टर में भी अग्रणी है।

विभिन्न सामाजिक दायित्व भी निभाया

उन्होंने बताया कि वे श्री सौराष्ट्र विसा श्रीमाली जैन मित्र मंडल रायपुर के तीन बार अध्यक्ष रहे है। इसके साथ ही आलू प्याज व्यापारी संघ के 21 वर्ष तक अध्यक्ष रहे है। लायंस क्लब ग्रेटर सिटी के चार्टेड अध्यक्ष, उज्जवल गौरक्षण केंद्र के ट्रस्टी, छत्तीसगढ़ सकल गुजराती समाज के संरक्षक रहे है। इसके साथ ही वर्तमान में वे कैट के प्रदेश अध्यक्ष व चेंबर के सलाहकार है।

जरूरतमंदों की शिक्षा व हास्पिटल का खर्च उठाती है संस्था

दोशी ने बताया कि उनके बड़े भाई वर्धमान स्थानक वासी जैन गुजराती संघ के अध्यक्ष रहे है। इस संघ द्वारा जरूरतमंदों की काफी मदद की जाती है। जैसे उनके समाज के किसी जरूरतमंद को शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल फीस,कालेज फीस या हास्पिटल का बिल जमा करने में सक्षम नहीं है तो पूरा खर्च संस्था द्वारा उठाया जाता है। कोरोना काल के समय से लेकर अब तक संस्था द्वारा जरूरतमंदों की मदद की जा रही है।

यह है शौक

उन्होंने बताया कि उन्हें घूमने फिरने के साथ ही पढ़ने का शौक है।

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