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कार सेवा के बाद करवाई थी FD, 30 साल बाद 21 गुना बढ़ी राशि, अब मंदिर निर्माण के लिए की दान

टीकमगढ़। श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति अभियान तीन चरणों में चला, जिसको लेकर टीकमगढ़ से कई कार सेवक सामने आए, जिन्होंने विभिन्न तरीकों से यहां पर कार सेवक की भूमिका निभाई। इसमें टीकमगढ़ के कार सेवकों ने विजय जुलूस के दौरान बचे हुए रुपये 1992 में बैंक में फिक्स डिपाजिट के तौर पर जमा कर किए थे। वहीं टीकमगढ़ के कार सेवक सरजू सिंह चौहान ने यह एफडी से प्राप्त ब्याज सहित 21 गुनी राशि श्रीराम जन्मभूमि न्यास अयोध्या को सौंप दी है, जिसकी रसीद भी वहां से कार सेवक को भेज दी गई।

गौरतलब है कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देशभर में हर्ष का माहौल व्याप्त हैं। टीकमगढ़ में भी विभिन्न मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित होने हैं। कई लोग दान कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं, तो कई लोग वहां पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन टीकमगढ़ में कार सेवकों द्वारा भगवान श्रीराम के विजय जुलूस की राशि को 29 साल बाद भी सुरक्षित रखा गया और अब उसे ट्रस्ट के सुपुर्द कर दिया।

कार सेवक कौशल किशोर भट्ट ने कहा कि टीकमगढ़ के कार सेवकों ने काफी आगे आकर कार्य किया है। मुझे प्रसन्नता हो रही है कि हमारे सामने भगवान श्री राम मंदिर में विराजमान हो रहे हैं।

मंदिर में दान का लिया था संकल्प

कार सेवक सरजू सिंह चौहान ने बताया कि 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढांचा ढहने के बाद देश के विभिन्न क्षेत्रों में विजय जुलूस निकाला गया, जो टीकमगढ़ में भी निकला। टीकमगढ़ में कटरा बाजार में मुख्य कार्यक्रम हुआ और पूरा शहर दुकानें बंद करके इस विजय जुलूस में शामिल हुआ। उस समय सभी कार सेवकों और श्रद्धालुओं ने दान स्वरूप राशि देकर सहयोग किया।

इस दौरान 1250 रुपये इस कार्यक्रम के बाद शेष बच गए। तब इस राशि को अन्य जगह खर्च नहीं किए की योजना बनाकर श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में इस राशि को भेजने का संकल्प किया। अब वह सपना साकार हो रहा है। ऐसे में 1250 रुपये एफडी के तौर पर स्टेट बैंक आफ इंडिया में जमा हुए और अब 26 हजार 737 रुपये ब्याज से मिलने के बाद मंदिर को भेजे गए। अब इस राशि का उपयोग मंदिर निर्माण में किया जाएगा, जिसकी रसीद भी मंदिर से कार सेवक सरजू सिंह चौहान को प्राप्त हुई है।

निकला था भव्य जुलूस

टीकमगढ़ के 81 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र अध्यर्वु ने कहा कि 1992 में विजय जुलूस टीकमगढ़ का देखने लायक था। जहां पर पूरे शहर की दुकानें बंद होने के बाद शहर के लोग जुलूस में शामिल हुए थे। कार सेवकों ने बढ़ चढ़कर सहयोग किया था। यही वजह है कि राशि शेष भव्य कार्यक्रम होने के बाद भी बच गई थी। अब इससे अधिक प्रसन्नता इस बात की है कि 1992 में एकत्र की गई धनराशि 21 गुनी होकर रामलला के मंदिर में लग रही है।

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