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ग्‍वालियर के मोटे गणेशजी, अपने आकार व अर्जी से मनोकामना के लिए है प्रसिद्ध

ग्वालियर। प्रथम पूज्य श्रीगणेशजी की आराधना का 10 दिवसीय उत्सव भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरु होगा। नगर के खासगी बाजार में मोटे गणेशजी व पिछले डेढ़ दशक से एमएलबी रोड पर स्थित अर्जी वाले गणेशजी की मान्यता बढ़ी है। गणेशजी के दोनों ही विग्रह 100 से 150 वर्ष प्राचीन है।मोटे गणेशजी अपने आाकार के लिए तो अर्जी वाले गणेश के साथ रिद्धि-सिद्धि के साथ अनूठी प्रतिमा के कारण श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बने हुए हैं। अमूमन गणेशजी के हाथ में मोदक या लड्डू होते हैं। अर्जी वाले गणेशजी के हाथों में वेद, शस्त्र, कमल और माला है। बुधवार को दोनों मंदिरों को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।चूकि ग्वालियर पर मराठी साम्राज्य रहा है, इसलिए इस क्षेत्र में श्रीगणेश की अधिक मान्यता है।

आकार के लिए प्रसिद्ध है मोटे गणेशजी

इंदौर में बड़े गणपति की तरह यहां भी मोटे गणेशजी की प्राचीन प्रतिमा महाराज बाड़े के नजदीक खासगी बाजार विराजित है।इस प्रतिमा को राजस्थान के मेबाड़ रियासत से स्थापित कराने के लिए लाया गया थी। इस मंदिर का जीणोद्धार तत्कालीन महाराज जीवाजी राव सिंधिया ने कराया था।

इसलिए गणेशभक्त इन्हें मोटे गणेशजी के नाम से पुकारते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि मोटे गणेशजी के दर्शन मात्र से सभी समस्याओं का समाधान हो जाता है। मोटे वाले गणेशजी के संबंध में एक और किदवंती प्रचलित है कि मोटे गणेशजी की प्रतिमा धरती से प्रकट हुई थी।

गणेशोत्सव के अलावा बुधवार को यहां श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ होती है।श्रद्धालु दुर्वा के साथ लड्डू व मोदक अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

डेढ़ सौ साल प्राचीन हैं अर्जी वाले गणेशजी

एमएलबी रोड पर कांग्रेस कार्यालय के सामने विराजित अर्जी वाले श्रीगणेशजी की अदभूत प्रतिमा डेढ़ सौ साल पूर्व की बताई गई है। बप्पा की सूड़ में तीन अंटे लगे हैं। इन्हें अर्जी वाले गणेशजी कहते हैं। इस मंदिर के प्रमुख ललित खंडेलवाल ने बताया कि मंदिर मांगने के लिए आने वाले श्रद्धालु नारियल के साथ एक पर्ची पर अपनी मन्नत लिखकर गणेशजी के श्रीचरणों में अर्पित करते हैं और मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालु की हर मन्नत पूरी करे के साथ श्रीजी सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु छप्पन भोग के साथ भंडारा भी कराते हैं।। श्रीजी यहां कांच के शीश महल जैसे भव्य मंदिर में विराजमान हैं।प्रति बुधवार को यहां भंडारे का भी आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही अर्जी वाले गणेशजी को मोदक व बुंदी के लड्डू सबसे प्रिय हैं। बुधवार को सुंदरकांड के पाठ का आयोजन किया जाता है। मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण भी विराजित हैं।

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