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डिंडौरी में नहीं परिवहन विभाग का दफ्तर, वाहनों की जांच करने मंडला से आई आरटीओ की टीम

 डिंडौरी। दो दिन पहले हुए रूह कंपा देने वाले हादसे के बाद यहां परिवहन विभाग ने वाहनों की जांच और धरपकड़ शुरू कर दी है। इस दौरान एक खासबात यह पता चली है कि डिंडौरी जिले में आरटीओ (परिवहन विभाग) का कार्यालय ही नहीं है।

यहां का आरटीओ से संबंधित सारा काम मंडला से होता है। मंडला से आए आरटीओ के अधिकारियों और कर्मचारियों ने शुक्रवार को वाहनों की जमकर धरपकड़ की। इस दौरान मालवाहक वाहन और यात्री बसें उसके खास निशाने पर रहे।

डिंडौरी जिले में शाहपुरा थाना क्षेत्र स्थित बड़झर घाट के पास हुए हादसे के बाद प्रशासन के तमाम संबंधित विभाग हरकत में आ गए हैं। 14 लोगों की मौत के बाद जागे इन विभागों ने शुक्रवार को कड़े पैमाने पर वाहन चेकिंग अभियान चलाया।

इस दौरान बस स्टैंड और आस-पास पाई गई बसों के फिटनेस, परमिट, रजिस्ट्रेशन और बीमा संबंधी कागजातों की जांच की गई। यहां मालवाहक वाहनों की भी सघन जांच की गई। आरटीओ के साथ यातायात पुलिस के भी अधिकारी-कर्मचारी विशेष धरपकड़ के दौरान सक्रिय रहे।

कार्रवाई के दौरान जबलपुर सहित अन्य जिलों से आने और जाने वाली बसों, ट्रैक्टर, पिकअप वाहन के दस्तावेजों की जांच की गई। साथ ही शहर की सड़कों पर दौड़ने वाले आटो को रोककर उनके भी दस्तावेजों की जांच की गई। दस्तावेजों में कमी पाए जाने पर बड़ी चालानी कार्रवाई की गई और वाहनों को कोतवाली भिजवाया गया।

पृथक डिंडौरी जिले की स्थापना मई 1998 में हुई थी। इसके बाद सभी विभागों के कार्यालय यहां खुल गए, लेकिन आरटीओ कार्यालय की स्थापना यहां नहीं हो पाई। 25 साल से डिंडौरी जिले के लोग मंडला के आरटीओ कार्यालय पर आश्रित हैं। यहां से मंडला की दूरी करीब 100 किलोमीटर होने की वजह से वाहन मालिक आरटीओ संबंधी काम कराने में लापरवाही बरतते हैं।

दुर्घटना के बाद डिंडौरी जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा ने यहां आरटीओ दफ्तर की जरूरत को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा है कि वे इसे लेकर राज्य शासन को प्रस्ताव भजेंगे, जिसके माध्यम से यहां पृथक आरटीओ कार्यालय खोले जाने की बात शामिल होगी।

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