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लाखों रुपये खर्च बनाए सरकारी कार्यालय, लेकिन नहीं आते अधिकारी, लोग परेशान

सागर। राजस्व संबंधी कार्यों केे लिए लोगों को भटकना न पड़े। इस उद्देश्य से जैसीनगर में एसडीएम कार्यालय की शुरुआत की गई थी। इसी तरह शाहपुर में उप तहसील कार्यालय खोला गया था, लेकिन दोनों ही जगहों पर अधिकारी नहीं पहुंच रहे हैं। इससे लोगों को परेशानी हो रही है।

जानकारी के मुताबिक जैसीनगर में एसडीएम कार्यालय तो खोला गया लेकिन यहां एसडीएम ही नहीं आते। लोगों को काम के लिए सागर ही जाना पड़ता है। लोगों के मुताबिक एसडीएम से स्वयं इस संबंध में चर्चा की थी। उन्होंने शुक्रवार के दिन आने की बात कही थी, लेकिन आज वे नहीं आए। वहीं बाजार का दिन होने की वजह से आसपास कई गांवों के लोग जैसीनगर खरीदी करने आते ही हैं। साथ में वे एसडीएम के आने की उम्मीद लेकर भी पहुंच गए थे, लेकिन उन्हें निराश लौटना पड़ा। अब लोग उम्मीद कर रहे हैं कि एसडीएम सोमवार को आएंगे लेकिन टीएल बैठक सहित निर्वाचन के कई काम होने की वजह से अधिकारी का समय पर पहुंचना मुश्किल है।

शाहपुर में भी उप तहसील के यही हाल

शाहपुर में उप तहसील (टप्पा तहसील) की शुरुआत की गई थी। यहां लाखों रुपये की लागत से भवन भी तैयार किया गया था, लेकिन वर्तमान में स्थिति यह है कि इस उप तहसील कार्यालय में नायब तहसीलदार बैठते ही नहीं। लोगों के मुताबिक केवल जिस दिन नायब तहसीलदार कार्यालय का उद्घाटन हुआ था उसी दिन अधिकारी आए थे, उसके बाद से कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है। साहब तो दूर पटवारी भी शाहपुर उप तहसील कार्यालय नहीं जाते। ऐसे में ग्रामीण आज भी 30 से 40 किमी दूर तहसील के छोटे-छोटे काम के लिए तहसील कार्यालय सागर जा रहे हैं।

आदेश का पालन नहीं हो रहा

शाहपुर क्षेत्र के लोगों ने इसको लेकर आक्रोश जताया है। उन्होंने मांग की कि सोमवार और गुरुवार को शाहपुर में नायब तहसीलदार कार्यालय विधिवत रूप से खोला जाए। सांसद प्रतिनिधि जगमोहन सिंह लोधी का कहना है कि शाहपुर में सोमवार और गुरुवार को नायब तहसीलदार के बैठने के दिन निर्धारित है, लेकिन इस आदेश का पालन नहीं हो रहा है। सप्ताह में दो दिन यदि वे यहां बैठने लगे तो आसपास के क्षेत्र के लोगों को राहत मिलने लगेगी।

पटवारी भी कभी नहीं आते

लोधी का कहना है कि नायब तहसीलदार तो छोड़िए यहां पटवारी भी मुख्यालय पर नहीं रहते। जबकि शासन के सख्त निर्देश है कि पटवारी मुख्यालय पर रहेगा। वहीं हरिशंकर लोधी का कहना है कि क्षेत्र के लोग छोटे-छोटे काम के लिए सागर भागते हैं। यहां पटवारी भी कभी नहीं आते।

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