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सिक्किम में बाढ़ से अब तक सेना के 7 जवानों समेत 40 लोगों की मौत, तीस्ता नदी में मिले 22 शव

 पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी और कूचबिहार में तीस्ता नदी से पांच महिलाओं सहित 22 शव बरामद किये गये हैं। अनुमान है कि ये लोग पड़ोसी राज्य सिक्किम के उत्तरी हिस्से में बुधवार को बादल फटने के बाद उभरी हिमालयी हिमनद झील में बाढ़ में बह गये थे। सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि कुल 22 शवों में से 15 जलपाईगुड़ी जिले के तीस्ता बैराज क्षेत्र के तहत विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के स्वयंसेवकों और बचाव कर्मियों को मिले, चार सिलीगुड़ी क्षेत्र में और शेष कूच बिहार जिले में पाए गए, जहां से सूजन वाली तीस्ता नदी सिक्किम से अपना मार्ग पार करती है और निकलती है।

सूत्रों ने बताया कि शव चार और पांच अक्टूबर बरामद किये गये। सूत्रों ने बताया कि सभी शवों को संबंधित जिला पुलिस थाने ने अपने कब्जे में ले लिया है और उनकी पहचान होने तक उन्हें सुरक्षित रखने के लिए मुर्दाघर में रख दिया है। सूत्रों ने बताया कि मृतकों में चार सेना के जवान है। बरामद किए गए शवों में से पांच की पहचान गोपाल मद्दी, एल नायक भवानी सिंह चौहान, एल नाकिक एनजी प्रसाद,राहुल मोदक और बिमल ओरान के रूप में की गई है।

अचानक आई बाढ़ में बुधवार सुबह छह बजे से सेना के 22 जवान लापता हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारी बारिश के कारण उत्तरी सिक्किम में हिमालयी हिमनद झील के किनारे टूटने से लगभग 100 लोग लापता हैं। सिक्किम में ल्होनक झील ओवरफ्लो हो गई जिसके परिणामस्वरूप बाढ़ आ गई।

मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने बताया कि बुरदांग इलाके से लापता हुए सेना के 23 जवानों में से सात के शव निचले इलाकों के विभिन्न हिस्सों से बरामद कर लिए गए हैं जबकि एक को बचा लिया गया तथा 15 लापता जवानों की तलाश जारी है। उत्तर सिक्किम में ल्होनक झील के ऊपर बुधवार सुबह बादल फटने से अचानक आयी बाढ़ के बाद 15 जवानों समेत कुल 103 लोग अब भी लापता हैं।

सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसएसडीएमए) ने अपने ताजा बुलेटिन में कहा कि अभी तक 2,411 लोगों को बचाकर राहत शिविरों में ले जाया गया है जबकि 22,000 से ज्यादा लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से प्रभावित चार जिलों में 7,644 लोगों को 26 राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।

ल्होनक झील के ऊपर बादल फटने से तीस्ता नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण भारी मात्रा में जल जमा हो गया और चुंगथांग बांध की ओर बह निकला। जल के तेज बहाव ने बिजली संयंत्र के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया और निचले इलाकों में बसे शहरों और गांवों में बाढ़ आ गई। बाढ़ से राज्य में 13 पुल बह गए, जिसमें अकेले मंगन जिले के आठ पुल शामिल हैं। गंगटोक में तीन और नामची में दो पुल बह गए।

आपदा में छह लोगों की गंगटोक में तथा चार-चार लोगों की मंगन और पाकयोंग में मौत हुई। घटना के बाद से कुल 103 नागरिक लापता हैं। उनमें से 59 पाकयोंग से, 22 गंगटोक से, 17 मंगन से और पांच नामची से लापता हैं। बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही चुंगथांग शहर में मचायी है और उसके 80 फीसदी हिस्सों पर इसका असर पड़ा है। राज्य की जीवनरेखा माने जाने वाले एनएच-10 को कई स्थानों पर भारी नुकसान पहुंचा है। इस बीच, तीस्ता बैराज के समीप निचले इलाके में सेना के 15 लापता जवानों की तलाश जारी है।

मुख्य सचिव वी बी पाठक ने बताया कि सेना मौसम में सुधार होने पर उत्तर सिक्किम में लाचेन, लाचुंग और चुंगथांग इलाकों में फंसे करीब 3,000 पर्यटकों को निकालने का अभियान शुक्रवार को शुरू कर सकती है। उन्हें हवाई मार्ग से मंगन लाया जाएगा और उसके बाद सड़क मार्ग से गंगटोक ले जाया जाएगा।

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