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हाईकोर्ट ने कहा, पूरे देश के लिए भिंड मुरैना वाले ही बनाते हैं नकली दूध-मावा

ग्वालियर। भिंड-मुरैना के लिए ये कहानी कौन सी नई है, यहां तो काफी पहले से यह सब चला आ रहा है। त्योहारी सीजन में नकली खोआ , नकली दूध बनाने का ठेका इन्हीं के पास तो होता है। पूरे हिंदुस्तान के लिए नकली खोआ और दूध यही बनाते हैं। त्योहार आया नहीं कि बनाकर बेचना शुरू। हाईकोर्ट की युगल पीठ के जस्टिस रोहित आर्या ने ग्वालियर चंबल संभाग में मिलावट के कारोबार को लेकर लगी याचिका में नाराजगी जताते हुए यह बात कही। उन्होंने गुरुवार की सुनवाई में ग्वालियर चंबल संभाग के सभी 9 कलेक्टरों को रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे, लेकिन इस सुनवाई पर रिकार्ड पेश नहीं किया गया, जिसपर टिप्पणी करते हुए जस्टिस आर्या ने अतिरिक्त महाधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी से कहा कि इस कारोबार की जड़ तक जाकर कलेक्टर कार्यवाही करें, सिर्फ चुनावों में व्यस्त होकर न रहें। अब इस मामले में अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी इसी दौरान कलेक्टरों द्वारा रिपोर्ट पेश की जानी है।

हाल ही में पकड़ा है नकली मावा

हाईकोर्ट जस्टिस रोहित आर्या ने मामले की सुनवाई के दौरान हाल ही में पकड़े गए नकली मावा की कार्यवाही को इंगित किया। उन्होंने कहा कि पिछली सुनवाई पर आर्डर हुआ उसी दिन नूराबाद में नकली मावा पकड़ा गया। इसका मतलब है कि मिलावटखोरी का कारोबार शुरू हो गया है। बता दें कि नूराबाद पुलिस ने लगभग 20 क्विंटल बरफी और मावा एक बोलेरो से बरामद किया था। यह सब मुरैना के एक व्यापारी का था, जिसे ग्वालियर से लेकर धौलपुर और अंबाह-पोरसा तक सप्लाई किया जाता है।

भिंड-मुरैना से चलता है कारोबार

त्योहार की दस्तक के साथ ही मुरैना भिंड में मिलावट का कारोबार सक्रिय हो जाता है। यह पहली बार नहीं है जब शहर में मिलावटी मावा आ रहा हो, हर बार के त्योहारों पर यही स्थिति होती है। नकली मावा-मिठाई शहर में आती है और छापेमारी में क्विंटलों मात्रा में पकड़ी भी जाती है। फिर भी शहर की मिठाइयों और डेयरी पर यह नकली दूध और मावा को खपाया जाता है। नकली- असली मावा की पहचान करना थोड़ा मुश्किल होता है, इसके कारण लोग यह नकली मावा खरीद लेते हैं।

यह था याचिका का मामला

उमेश कुमार बोहरे ने हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में ग्वालियर चंबल संभाग में सक्रियता से चल रहे मिलावट के कारोबार को लेकर याचिका दायर की थी। इस याचिका की सुनवाई हुई और सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस संबंध में दिशा निर्देश भी जारी किए थे, लेकिन मुख्य सचिव ने कुछ नहीं किया। इसके बाद इस मामले में अवमानना दायर की गई।

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