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सर्वार्थ सिद्धि योग में जन्माष्टमी, तीन दशक में एक बार बनता है ऐसा योग

 भोपाल। सनातन धर्म में शैव तथा वैष्णव मत का प्रचलन है। जिस कारण जन्माष्टमी को लेकर हमेशा से दो मत रहे हैं। शैव मत की जन्माष्टमी छह सितंबर को और वैष्णव मत के अनुसार सात सितंबर को मनेगी। छह को सर्वार्थ सिद्धि योग में विशिष्ट पूजन विशेष फलदायी होगा। भाद्रपद मास के कूष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। इस बार छह सितंबर बुधवार को रोहिणी नक्षत्र में श्री कृष्ण का जन्मोत्सव वृषभ राशि के चंद्रमा की साक्षी में मनाया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी रोहिणी युक्त मध्य रात्रि में विशेष मानी जाती है।

विशेष फलदायी होगी जन्माष्टमी

अष्टमी तिथि का योग

बुधवार की मध्य रात्रि में साक्षी क्रम से रहेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम ने बताया कि छह सितंबर बुधवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाना शास्त्रागत रहेगा। पंचांग की गणना के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर बुधवार का दिन एवं मध्य रात्रि में रोहिणी नक्षत्र का अनुम रहने से सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन चंद्रमा अपने उच्च अंश में वृषभ राशि के साथ रहेंगे। रोहिणी चंद्रमा की पत्नी है, चूंकि चंद्र उच्च में होकर केंद्र त्रिकोण को साधेंगे। इस दृष्टि से यह योग विशेष रूप से पूजन का फल देने वाला होगा। वहीं ग्रह गोचर में सूर्य अपनी राशि सिंह में गोचर करेंगे और शनि कुंभ राशि में वक्रीय रहेंगे।

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