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छठ पूजा में नहाय खाय के दिन इन चीजों से करें परहेज, जरूरी हैं ये नियम

इंदौर। सनातन धर्म में सूर्य पूजा का विशेष महत्व है। सूर्य देव की पूजा करने से शारीरिक और मानसिक परेशानियां दूर होती हैं। इसके अलावा कुंडली में सूर्य मजबूत होता है। कुंडली में सूर्य मजबूत हो, तो करियर और बिजनेस में मनचाही सफलता मिलती है। प्राचीन काल से ही सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा की जाती रही है। छठ पूजा, वैदिक काल से लोक आस्था का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे बिहार में सूर्य की पूजा के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य देव को समर्पित है। इसमें सूर्य देव की पूजा की जाती है। इस चार दिवसीय त्योहार की शुरुआत नहाय खाय दिन से होती है।

इस दिन से शुरू होगी छठ पूजा

पंचांग के अनुसार, इस साल चार दिवसीय छठ पूजा 17 नवंबर से शुरू होगी। इस दिन भक्त स्नान, ध्यान करते हैं और सूर्य की पूजा करते हैं। साथ ही सूर्य देव की पूजा करने के बाद भोजन ग्रहण किया जाता है। इसमें चावल, दाल और लौकी की सब्जी खाई जाती है। नहाय खाय के दिन पूजा करने से व्रती के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। नहाय खाय के दिन कई काम न करने की सलाह दी गई है। इन नियमों को नजरअंदाज करने से पुण्य फल नहीं मिलता है। आइए, जानें नहाय खाय के दिन के व्रत नियम।

नहाय खाय के दिन करें ये काम

  • नहाय खाय के दिन पवित्र नदी में स्नान करें। यदि संभव न हो, तो गंगाजल युक्त जल से स्नान करें। इस समय आचमन करके स्वयं को शुद्ध कर लें।
  • नहाय खाय वाले दिन नए कपड़े पहनें। व्रती लाल, भूरे या पीले रंग की साड़ी पहन सकती हैं।
  • नहाय खाय के दिन व्रती को अपने बाल अवश्य धोने चाहिए। इसके लिए व्रती मुल्तानी मिट्टी शैम्पू का उपयोग कर सकती हैं।
  • नहाय खाय के दिन केवल एक बार ही भोजन किया जाता है। इसलिए केवल एक समय ही भोजन करें। इसके अलावा चाय या कॉफी भी सीमित मात्रा में पिएं।
  • व्रती नहाय खाय के दिन साफ ​​चूल्हे पर ही खाना बनाएं। मिट्टी के चूल्हे पर खाना पकाना शुभ होता है। भोजन में चावल, मूंग या चने की दाल और कद्दू की सब्जी का सेवन करना चाहिए।

नहीं करें ये काम

  • नहाय खाय के दिन न तो झूठ बोलें और न ही किसी से अशब्द कहें। ऐसा करने से व्रत का पुण्य फल नहीं मिलता है।
  • इस दिन तामसिक भोजन का ही सेवन न करें। साबुत अनाज या तले हुए खाद्य पदार्थ न खाएं। सात्विक भोजन ही करें।
  • नहाय खाय के दिन व्रती काले रंग की साड़ी न पहनें। शुभ और मांगलिक कार्यों में काले रंग की कपड़े नहीं पहनना चाहिए।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

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