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कांग्रेस का संकट, दिल्ली की राह में टांग अड़ा रहे हाथी काे कैसे रोकें

2024: हरिओम गौड़.मुरैना। मुरैना लोकसभा से भाजपा के प्रत्याशी को तय हुए करीब एक महीना हो गया, लेकिन चुनावी माहौल अब तक नहीं बन पा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस और बसपा ने अपने उम्मीदवार अब तक तय नहीं किए हैं। उधर बेहतर प्रत्याशी की खोज में जुटी कांग्रेस की सबसे बड़ी परेशानी बसपा को लेकर है। बीते डेढ़ दशक से ऐसा हो रहा है, कि कांटे की टक्कर में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ रहा है। तीन चुनाव से ऐसा हुआ है, कि कांग्रेस की जीत में बसपा रोड़ा बन जाती है, इससे कैसे पार पाई जाए? इस मंथन में कांग्रेस जुटी हुई है।

गौरतलब है, कि मुरैना-श्योपुर लोकसभा सीट पर बीते 33 साल और सात चुनावाें से भाजपा का कब्जा है। इस सीट पर साल 1991 में कांग्रेस के बारेलाल जाटव ने जीत दर्ज की थी, उसके बाद से कांग्रेस का कोई भी कद्दावर मुरैना से संसद तक का सफर नहीं कर पाया। इस सूखे को खत्म करने में कांग्रेस के तरकश के तीरों को भाजपा के साथ-साथ बसपा भी फेल कर रही है। ऐसा इसलिए, क्याेंकि मुरैना-श्योपुर सीट पर बसपा का प्रत्याशी तब सामने आता है, जब कांग्रेस का उम्मीदवार मैदान में आता है। अगर बसपा ने पहले प्रत्याशी घोषित कर दिया तो कांग्रेस का प्रत्याशी सामने आने के बाद बसपा अपना उम्मीदवार भी बदल देती है, जो कांग्रेस के वोट कटवा साबित होता है और भाजपा के लिए फायदेमंद। इस बार भी हालात ऐसे ही हैं। बसपा वेट एण्ड वाट की हालत में और कांग्रेस का प्रत्याशी सामने आने के बाद ही हाथी अपने महावत के साथ चुनावी रण में उतरेगा। पर इस बार कांग्रेस इस मायाजाल को कैसे तोड़े, इसके लिए मुरैना के अलावा ग्वालियर, भिंड और भोपाल के कुछ नेताआें को मंथन-चिंतन एवं तोड़ निकालने पर लगा दिया है।

हाथी की करवट से हर बार कांग्रेस ही क्षतिग्रस्त हो रही

साल 2019 के चुनाव में भाजपा ने नरेंद्र सिंह तोमर को टिकट दिया था, तो बसपा से भिंड के कद्दावर नेता रामलखन सिंह टिकट ले गए। इसी बीच कांग्रेस ने रामनिवास रावत को मैदान में उतारा। बसपा से क्षत्रिय नेता मैदान में उतरने से भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर को नुकसान होना तय माना जा रहा था और राताेंरात हुआ यह, कि बसपा ने रामलखन सिंह का टिकट काटकर उत्तर प्रदेश व हरियाणा सरकार में मंत्री रहे करतार सिंह भड़ाना को टिकट दे दिया। करतार भड़ाना को 1.29 लाख वोट मिले और भाजपा के तोमर 1.13 लाख से ज्यादा मतों से जीत गए।

 

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अनूप मिश्रा को मुरैना-श्याेपुर सीट से उतारा और कांग्रेस ने डा. गोविंद सिंह को प्रत्याशी बनाया। कांग्रेस को मिलने वाले क्षत्रिय वोट तब बंट गए जब बसपा ने वृंदावन सिंह सिकरवार को उम्मीदवार बनाकर दिया। वृंदावन सिंह चंबल के क्षत्रिय समाज में खासा प्रभाव रखते हैं, यह चुनाव परिणाम में भी दिखा जब डा. गोविंद सिंह न सिर्फ जीवन का पहला चुनाव हारे, बल्कि इस चुनाव में कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही।

 

2009 के चुनाव में भाजपा से नरेंद्र सिंह तोमर और कांग्रेस ने रामनिवास रावत आमने-सामने थे। इस चुनाव में कांग्रेस को ब्राह्मण वोट के साथ जीत मिलने की आस जगी, तभी बसपा से बलवीर सिंह डण्डोतिया को मैदान में उतार दिया और 1.10 लाख से ज्यादा ब्राह्मण वोट के साथ कुल 1.42 लाख मत बलवीर सिंह ले गए। नजीता यह रहा, कि कांग्रेस को एक लाख से ज्यादा वोटाें से हार झेलनी पड़ी।

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