Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
PM मोदी का 76वां जन्मदिन आज, बोले आशीर्वाद सेवा का संकल्प मजबूत करता है BRICS Summit 2026: भारत के लिए कितना अहम है यह शिखर सम्मेलन? जानिए समूह से जुड़ी जरूरी बातें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹8,000 से बढ़कर ₹12,000 प्रतिमाह: UP सरकार का बड़ा ऐलान राजस्थान निकाय चुनाव 2026: 9 और 11 सितंबर को मतदान, 14 सितंबर को आएंगे नतीजे चोरी के डर से छत पर चढ़ा दी Scorpio! गोपालगंज में क्रेन से दो मंजिल ऊपर पहुंचाई SUV सड़क बनेगी तो धंसेगी, धंसेगी तो बनेगी: केशव मौर्य इंडोनेशिया में माउंट अनाक क्राकाटाऊ में जोरदार विस्फोट, 50,000 फीट तक पहुंचा राख का गुबार भारत के राष्ट्रपति ने शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। Happy Teachers Day 2026: शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है? जानें इतिहास और महत्व शुभ जन्माष्टमी: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर देशभर में भक्ति और उल्लास

भोपाल में नए कानून BNS में पहली एफआईआर दर्ज, जानिए क्या हुआ बदलाव, अब कैसे एक्शन लेगी पुलिस

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के हनुमानगंज थाने में नए कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की तहत पहली एफआईआर गाली गलौज की धारा 296 में दर्ज की गई। इस प्रकार की घटना होने पर पहले आईपीसी की धारा 294 के तहत मामला दर्ज होता था।

नए कानून में इस धारा में तीन महीने का कारावास या जुर्माना भी लगा सकता है। इसके साथ दोनों के तहत सजा दे सकती है। इस प्रकार के प्रकरण में सिर्फ धारा बदली है, सजा करीब-करीब बराबर ही है।

रात 12.05 मिनट की है घटना

हनुमानगंज गंज पुलिस के मुताबिक ईसरानी मार्केट थाना हनुमानगंज निवासी 40 वर्षीय प्रफुल्ल पिता जय नारायण चौहान ने शिकायत की थी वह सामातंर कट प्वाइंट से गुजर रहे थे। उस समय राजा उर्फ हरभजन ने उसके साथ गाली गलौच कर मारपीट की। घटना एक जुलाई रात 12 बजकर 5 मिनट की थी। इस पर पुलिस ने आरोपित पर भारतीय न्याय संहिता के धारा 296 में एफआईआर दर्ज कर ली है।

इस मामले की जांच अधिकारी एसआई विवेक शर्मा ने बताया कि इस घटना में पहले आइपीसी 294 में एफआईआर होती थी। अब नई धारा 296 में एफआइआर दर्ज की गई है। इसमें एफआईआर जब्ती कुछ नहीं हुई है, इसलिए ऑडिया और वीडियो अपलोड नहीं किए गए थे। इस धारा में सजा का प्रावधान पहली की तरह ही है, ज्यादा कुछ बदलाव नहीं है।

नए कानून बीएनएस में यह है सजा का प्रावधान

धारा 296 में दोषी को एक अवधि के लिए कारावास की सजा सुनाई जा सकती है। कारावास को तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है। दोषी पर इसके अलावा जुर्माने लगाया जा सकता है, जिसे एक हजार रुपए तक बढ़ाया जा सकता है। दोषी को इसमें कारावास के साथ जुर्माने की सजा से भी दंडित किया जा सकता है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.