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इस व्रत कथा के बिना अधूरी है हरियाली तीज की पूजा, विवाह में आती हैं अड़चनें!

हिन्दू धर्म में सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन हरियाली तीज का पर्व बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है. इसे हरियाली तीज और हरतालिका तीज के नाम से भी जाना जाता है. वहीं इस साल ये व्रत दिनांक 7 अगस्त को रखा जाएगा. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है. यह व्रत सुहागिन महिलाओं के अलावा कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं. इस दिन सभी महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं.

हरियाली तीज के मौके पर हरे रंग का विशेष महत्व होता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं हरी साड़ी, हरी कांच की चुड़ियां खासकर पहनती हैं. मान्यता है कि इस दिन पूजा करने के साथ-साथ हरियाली तीज की कथा जरूर सुननी चाहिए. वरना व्रत सफल नहीं माना जाता है. इस व्रत कथा के बिना हरियाली तीज की पूजा अधूरी मानी जाती है. जिसके कारण विवाह में कई तरह की अड़चनें आती हैं.

हरियाली तीज के दिन जरूर पढ़ें व्रत कथा

एक बार की बात है, जब भगवान शिव (भगवान शिव मंत्र) मां पार्वती को उनके पूर्व जन्म के बारे में याद कराते हुए कहते हैं कि हे पार्वती ! तुमने मुझे पति के रूप में पाने के लिए हिमालय पर कठिन तपस्या की थी. यहां तक कि तुमने अन्न और जल के साथ-साथ सर्दी, गर्मी, बरसात जैसे सभी ऋतुओं में बहुत कष्ट सहा है. तुम्हारी तपस्या देखकर तुम्हारे पिताजी पर्वतराज बहुत दुखी हुए थे.

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