Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
PM मोदी का 76वां जन्मदिन आज, बोले आशीर्वाद सेवा का संकल्प मजबूत करता है BRICS Summit 2026: भारत के लिए कितना अहम है यह शिखर सम्मेलन? जानिए समूह से जुड़ी जरूरी बातें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹8,000 से बढ़कर ₹12,000 प्रतिमाह: UP सरकार का बड़ा ऐलान राजस्थान निकाय चुनाव 2026: 9 और 11 सितंबर को मतदान, 14 सितंबर को आएंगे नतीजे चोरी के डर से छत पर चढ़ा दी Scorpio! गोपालगंज में क्रेन से दो मंजिल ऊपर पहुंचाई SUV सड़क बनेगी तो धंसेगी, धंसेगी तो बनेगी: केशव मौर्य इंडोनेशिया में माउंट अनाक क्राकाटाऊ में जोरदार विस्फोट, 50,000 फीट तक पहुंचा राख का गुबार भारत के राष्ट्रपति ने शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। Happy Teachers Day 2026: शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है? जानें इतिहास और महत्व शुभ जन्माष्टमी: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर देशभर में भक्ति और उल्लास

छात्रवृत्ति घोटाले में फंसे इंदौर के पैरामेडिकल संस्थान को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट ने पैरामेडिकल छात्रवृत्ति घोटाले में फंसे इंदौर के एक पैरामेडिकल संस्थान को आगामी तीन माह के लिए वसूली से अंतरिम राहत दे दी है। न्यायमूर्ति विक्रमनाथ व न्यायमूर्ति अमनुल्लाह की युगलपीठ ने शासन को निर्देश दिए कि इंदौर के पैरामेडिकल टेक्नोलाजी आर्गनाइजेशन आफ मध्यप्रदेश की सील 24 घंटे के भीतर खोल दें। इसके साथ ही वहां अध्ययनरत छात्रों को पढ़ाई की अनुमति दें। हाई कोर्ट ने प्रदेश की कई संस्थानों से वसूली करने के निर्देश दिए थे। वहीं शासन ने कुछ संस्थाओं को सील कर दिया था। उक्त संस्थान ने हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।

यह दी गई दलील

संस्थान की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि सुनवाई का मौका दिए बिना वसूली प्रारंभ कर दी गई है। दस साल पुराने प्रकरण मे पांच सौ से अधिक छात्रों को शिक्षण देने वाले संस्थान को सील कर दिया गया, जिससे सभी छात्रों के अध्यन व भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

यह था मामला

साल 2012-13 के दौरान पैरामेडिकल कालेजों ने एसटी, एससी छात्रों के दस्तावेज लेकर उन्हें अपने यहां प्रवेश होना बता दिया और इसकी छात्रवृत्ति शासन से ले ली। घोटाला उजागर होने के बाद इंदौर में तत्कालीन कलेक्टर ने इसकी जांच कराई थी। इसके बाद से शासन द्वारा वसूली की कवायद की जा रही है। बाद में मामला कोर्ट चला गया। अब उच्च न्यायालय के आदेश से वसूली की जा रही है। जिससे राहत पाने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लगाई गई थी।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.