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MP का बीजामंडल सूर्य मंदिर या मस्जिद? ASI ने ऐसा क्या कहा कि नागपंचमी पर मच गया हंगामा… ये है पूरी कहानी

मध्य प्रदेश में भोजशाला के बाद अब एक नया विवाद विदिशा के बिजामंडल को लेकर शुरू हो गया है. शुक्रवार को नागपंचमी पर यहां हिंदू पक्ष ने पूजा करने की अनुमति मांगी. लेकिन एएसआई के एक लैटर ने इस पर हंगामा मचा दिया. कलेक्टर ने बीजामंडल को मस्जिद बताकर यहां पूजा की अनुमति नहीं दी. इधर, पूजा को लेकर हिंदू समाज ने तैयारी की हुई है. वह शुक्रवार शाम 4 बजे यहां पूजा करने पहुचेंगे. ऐसे में सुरक्षा को देखते हुए भारी पुलिस फोर्स बीजामंडल पर तैनात किया गया है.

कलेक्टर ने बुद्धेश कुमार वैद्य का कहना है कि एएसआई के दस्तावेजों में जो उल्लेख था उसी को उन्होंने अपने पत्र में लिया है. सुरक्षा व्यवस्था और नाग पंचमी पर होने वाली पूजा को लेकर उन्होंने कहा कि जो परंपरा और जन भावना पूर्व से चली आ रही है उसका निर्वहन किया जाएगा. वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत चौबे ने कहा कि पिछले साल जिस तरीके से सुरक्षा के इंतजाम किए थे उसी प्रकार की स्थिति शुक्रवार को होगी.

70 सालों से लटका है ताला

बीजामंडल शहर के बीचों बीच स्थित एक विवादित स्थल है. देखने पर नई संसद भवन की डिजाइन इसी की तरह है. यहां 70 सालों से ताला लटका हुआ है और यह एएसआई के अधीन है. 1951 की गजट अधिसूचना में बीजामंडल को मंदिर नहीं, बल्कि मस्जिद बताया गया है. दूसरी ओर हिंदू पक्ष का इसको लेकर दावा है कि यह 2500 साल पुराना सूर्य मंदिर है. इसे ‘विजय मंदिर’ या ‘बीजामंडल’ के नाम से जाना जाता है. दावा किया गया है कि चालुक्य प्रधानमंत्री वाचस्पति ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था.

औरंगजेब ने तोपों से ध्वस्त करा बनवाई मस्जिद!

साल 1024 में महमूद गजनवी के साथ भारत आया विदेशी यात्री अलबरूनी ने भी इसका जिक्र किया है. हिंदू पक्ष का यह भी कहना है कि औरंगजेब के आदेश पर साल 1682 में बीजामंडल को तोपों से ध्वस्त किया गया था. उसके बाद यहां मस्जिद बनवा दी गई थी. हिंदू पक्ष का कहना है कि देश की आजादी के बाद हिंदू महासभा ने इसके लिए सत्याग्रह छेड़ा. साल 1964 में आखिरी बार यहां ईद की नमाज अदा की गई. 1965 में इसके लिए आंदोलन शुरू हुआ.

सरकार ने लगाई नमाज पर रोक

तत्कालीन सरकार ने यहां नमाज प्रतिबंधित कर इसे शासकीय धरोहर घोषित कर दिया था. साथ ही मुस्लिमों को नमाज अदा करने के लिए एक ईदगाह के नाम से अलग जगह दे दी गई. आज भी इसी जगह पर मुस्लिम लोग नमाज अदा करते हैं. 1991 में तेज बारिश के कारण मंदिर की दीवार ढही, जिसमें हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां निकलने का दावा किया गया. जिसके बाद ASI ने यहां तीन वर्षों तक खुदाई की. हिंदू पक्ष का कहना है कि खुदाई में मंदिर होने के साक्ष्य मिले. जिसमें शिवलिंग, विष्णु भगवान की मूर्ति शामिल थीं. तब से ही ये क्षेत्र प्रतिबंधित क्षेत्र है.

नाग पंचमी पर मांगी पूजा की इजाजत

यहां नाग पंचमी पर हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति मिलती रही है. हिंदू संगठनों ने कलेक्टर से नागपंचमी के दिन बीजामंडल का ताला खोलकर पूजा करने की इजाजत मांगी. लेकिन जिला कलेक्टर ने ASI का हवाला देकर बीजामंडल का ताला खोलने से इनकार कर दिया. दरअसल, आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के दस्तावेज में ये जगह मस्जिद के नाम से दर्ज है. इस पर हिंदू संगठनों ने एतराज जताया है. हिंदू पक्ष का कहना है कि वो पिछले कई सालों से यहां पूजा करते आ रहे हैं. ASI के दावे से भ्रम पैदा हो रहा है.

हिंदू पक्ष का दावा मुस्लिमों को नहीं एतराज

हिंदू पक्ष का यह भी कहना है कि मुस्लिम पक्ष ने कभी इसके मस्जिद होने का दावा नहीं किया. इस पर खेद जताते हुए विजय मंदिर मुक्ति सेवा समिति के सदस्यों ने स्थानीय बीजेपी विधायक मुकेश टंडन के नेतृत्व में विदिशा कलेक्टर और एसपी को लिखित ज्ञापन दिया गया. लैटर में उन्होंने इसे मंदिर बताते हुए एएसआई द्वारा मस्जिद बताए जाने पर आपत्ति उठाई है.

केंद्र और प्रदेश सरकार को भेजा पत्र

इसके अलावा उन्होंने प्रदेश और केंद्र सरकार को भेजे पत्र इस स्थान का दोबारा सर्वे करने की मांग की है. पत्र में राम मंदिर, ज्ञानवापी और अन्य जगहों का उदाहरण देते हुए यहां दोबारा सर्वे कर वास्तविक स्थिति पता कर मस्जिद शब्द को विलोपित करने की बात कही है. पत्र में यह भी कहा गया है कि पूर्व में जो विवाद हिंदू-मुस्लिम का था वह खत्म हो चुका है. मुस्लिम समाज भी एएसआई के फैसले को लेकर हिंदुओं के समर्थन में है. विधायक ने मुस्लिम समाज का भी आभार प्रकट किया है.

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