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जूते पहनकर खाना सही या गलत, जानिए धार्मिक और विज्ञान क्या कहता है

इंदौर। हिंदू धर्म में भोजन को सबसे पवित्र कार्यों में से एक माना गया है। देवी अन्नपूर्णा भोजन प्रदान करती हैं। इसके अलावा खाना पकाने में आग का उपयोग किया जाता है। हिंदू धर्म में वैदिक काल से ही अग्नि की पूजा की जाती रही है। इसलिए धार्मिक या पवित्र कार्य करते समय जूते या चप्पल पहनना वर्जित है।

इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

जूते-चप्पलों में कई तरह की गंदगी, कीचड़ और बदबूदार चीजें होती है। इससे आपके खाने में बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं जो आपको बीमार कर सकते हैं। ऐसे में जूते-चप्पल पहनकर खाना स्वास्थ्य के दृष्टि से अच्छा नहीं है।

आइए जानते हैं धार्मिक कारण

हिंदू धर्म में भोजन और अग्नि को पवित्र माना जाता है। दोनों ही मनुष्य की भूख को संतुष्ट करते हैं। अगर आप जूते-चप्पल पहनकर भोजन करते हैं तो आपको नकारात्मकता का सामना करना पड़ता है। साथ ही देवी अन्नपूर्णा नाराज हो जाती है। इस धार्मिक कारण के चलते किचन में जूते पहनकर जाना वर्जित है।

भोजन करते समय इन नियमों का पालन करें

हमेशा हाथ-पैर धोकर खाना खाने बैठना चाहिए। कभी भी बिस्तर पर बैठकर खाना न काएं। इससे मां अन्नपूर्णा और देवी लक्ष्मी अप्रसन्न हो जाती हैं। यह वास्तु के नजरिए से भी गलत है। इससे वास्तु दोष उत्पन्न होता है।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

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