Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
PM मोदी का 76वां जन्मदिन आज, बोले आशीर्वाद सेवा का संकल्प मजबूत करता है BRICS Summit 2026: भारत के लिए कितना अहम है यह शिखर सम्मेलन? जानिए समूह से जुड़ी जरूरी बातें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹8,000 से बढ़कर ₹12,000 प्रतिमाह: UP सरकार का बड़ा ऐलान राजस्थान निकाय चुनाव 2026: 9 और 11 सितंबर को मतदान, 14 सितंबर को आएंगे नतीजे चोरी के डर से छत पर चढ़ा दी Scorpio! गोपालगंज में क्रेन से दो मंजिल ऊपर पहुंचाई SUV सड़क बनेगी तो धंसेगी, धंसेगी तो बनेगी: केशव मौर्य इंडोनेशिया में माउंट अनाक क्राकाटाऊ में जोरदार विस्फोट, 50,000 फीट तक पहुंचा राख का गुबार भारत के राष्ट्रपति ने शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। Happy Teachers Day 2026: शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है? जानें इतिहास और महत्व शुभ जन्माष्टमी: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर देशभर में भक्ति और उल्लास

साढ़े पांच वर्ष पहले हुई थी घटना, अब तक अंतिम बहस ही नहीं हुई

इंदौर। साढ़े पांच वर्ष पहले हुई दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बस दुर्घटना में अब तक यही तय नहीं हो सका कि यह दुर्घटना किसकी लापरवाही से हुई थी। दुर्घटना के बाद ताबड़तोड़ कई याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर हुई लेकिन इन याचिकाओं में अब तक अंतिम बहस ही नहीं हो सकी है। मंगलवार को एक बार फिर ये याचिकाएं सुनवाई पर लगी हैं। देखना यह है कि इस बार अंतिम बहस पूरी हो पाती है या एक बार फिर मामले में सुनवाई आगे बढ़ जाती है।

यह था बस हादसा

5 जनवरी 2018 को दिल्ली पब्लिक स्कूल की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। बायपास पर हुई इस दुर्घटना में बस में सवार पांच बच्चों सहित छह लोगों की मृत्यु हो गई थी। कई बच्चे गंभीर रूप से घायल भी हो गए थे जिनका इलाज कई माह तक विजय नगर क्षेत्र स्थित एक अस्पताल में चलता रहा।

इस दुर्घटना की शासन स्तर पर जांच भी हुई थी। इसमें यह बात सामने आई थी कि दुर्घटना के समय बस अत्यंत तेज गति से चलाई जा रही थी। उसकी गति 80 किमी प्रतिघंटा से ज्यादा थी। इस दुर्घटना की चर्चा पूरे देश में हुई थी। हादसे को लेकर 6 याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर हुईं।

इन सभी में दुर्घटना के लिए जिम्मेदारों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने और दुर्घटना में मृत लोगों के स्वजन और घायलों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की गई है। पिछली सुनवाई पर एक याचिकाकर्ता ने अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय ले लिया था। मंगलवार को याचिकाओं में अंतिम बहस होना है।

कई बार टल चुकी है अंतिम बहस

हाई कोर्ट में याचिकाओं की सुनवाई एक साथ चल रही है। यही वजह है कि अंतिम बहस कई बार टल चुकी है। दरअसल एक से अधिक याचिकाएं होने से सभी याचिकाकर्ता एक साथ उपस्थित नहीं हो पाते।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.