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इस कारण हर महीने मनाया जाता है शिवरात्रि का पर्व, क्या है इसका महत्व?

 हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. शिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है. भोलेनाथ के साथ साथ माता पार्वती की कृपा पाने के लिए भक्त गण इस दिन पूरे विधि विधान और श्रद्धा के साथ भगवान शिव और मां पार्वती का व्रत और पूजन करते हैं. इस वर्ष शिवरात्रि 4 जुलाई 2024, दिन वीरवार को मनाई जाएगी. शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है इसको लेकर बहुत सी पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं.

शिवरात्रि का पर्व मनाने के पीछे की कुछ पौराणिक कथाएं

  • भगवान शिव का विवाह

  • पौराणिक कथा के अनुसार, शिवरात्रि भगवान शिव और पार्वती के विवाह के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है. माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था.
  • समुद्र मंथन

  • एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, शिवरात्रि समुद्र मंथन के प्रारंभ का प्रतीक है. समुद्र मंथन से अमृत निकालने के लिए देवताओं और दानवों ने मिलकर इसी दिन से काम शुरू किया था.
  • माता पार्वती द्वारा भोलेनाथ की स्तुति

  • एक अन्य पौराणिक कथा है कि एक बार भगवान शिव क्रोधित हो गए तब उनकी क्रोधाग्नि से संसार के भस्म होने का खतरा मंडराने लगा. तब माता पार्वती ने भगवान शिव की स्तुति की और उनको प्रसन्न किया, जिससे भगवान शिव का क्रोध शांत हो गया. इस मान्यता के कारण भी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है.
  • भगवान शिव का तांडव नृत्य

  • यह भी माना जाता है कि शिवरात्रि भगवान शिव के तांडव नृत्य का भी प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि भगवान शिव इस दिन ब्रह्मांड का विनाश करते हैं और फिर से इसका निर्माण करते हैं.
  • मोक्ष की प्राप्ति

  • शिवरात्रि को मोक्ष प्राप्ति का भी अवसर माना जाता है. जो भक्त इस दिन भगवान शिव की पूजा करते हैं, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है.
  • अहंकार का नाश

  • एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया कि दोनों देवताओं में श्रेष्ठ कौन है. इनका विवाद बढ़ने लगा तब भगवान शिव ने लीला की और एक अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट हो गए और दोनों देवताओं को इस स्तंभ का आदि और अंत ढूंढने के लिए कहा. दोनों ही देवता ऐसा नहीं कर पाए और उनको अपनी गलती का अहसास हुआ. तभी से यह मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना करने और शिवलिंग के जलाभिषेक करने से व्यक्ति के अहंकार का नाश होता है, और इसी कारण शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है.

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