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किसानों, व्यापारियों के लिए शुभ संकेत लेकर आ रही है शारदीय नवरात्र, पहले दिन मां शैलपुत्री की होगी पूजा

रायपुर। आश्विन शुक्ल पक्ष में 15 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। पूरे नौ दिनों में अनेक शुभ संयोगों में देवी दुर्गा का पूजन, आरती करने से सुख-समृद्धि का वास होगा। पहले दिन पद्म योग का संयोग है। देवी दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जो सौभाग्य का सूचक है। राज्य, देश, दुनिया के लिए शारदीय नवरात्र शुभ होगी।

किसानों, व्यापारियों, नौकरीपेशा, विद्यार्थियों सभी वर्ग के लिए यह नवरात्र शुभ संकेत लेकर आ रही है। राजधानी के देवी मंदिरों में 40 हजार से अधिक जोत प्रज्वलित होंगी। दो बड़े प्रसिद्ध मंदिरों में ही लगभग 20 हजार जोत प्रज्वलित की जा रही है।

चकमक पत्थर की चिंगारी से महाजोत का प्रज्वलन

पुरानी बस्ती के ऐतिहासिक महामाया मंदिर की परंपरा के अनुसार चकमक पत्थर को रगड़कर उससे निकलने वाली चिंगारी से महाजोत प्रज्वलित की जाएगी। महाजोत से जोत लेकर श्रद्धालुओं की मनोकामना जोत का प्रज्वलन किया जाएगा।

गायत्री शक्तिपीठ में 24 हजार मंत्रों से आराधना

समता कालोनी स्थित गायत्री शक्तिपीठ में 24 हजार मंत्रों के साथ माता की साधना और आराधना की जाएगी। पहले दिन स्वस्तिक के प्रतीक रूप में ज्योति कलश की स्थापना की जाएगी।

स्थापना

रविवार को सुबह पद्म योग में घर-घर में घट स्थापना, जंवारा कलश की स्थापना की जाएगी। देवी मंदिरों में अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11.36 से 12.24 बजे के मध्य जोत प्रज्वलन की प्रक्रिया होगी।

नवरात्र में अनेक शुभ संयोग

ज्योतिषाचार्य डा. दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार अनेक सालों बाद ऐसा हो रहा है जब चित्रा नक्षत्र में नवरात्र प्रारंभ हो रही है। साथ ही नवरात्र के नौ दिनों में अनेक शुभ संयोग बन रहे हैं। इन संयोगों में शुभ कार्य करने से उचित फल की प्राप्ति होगी। 17 अक्टूबर को रवि योग, प्रीति योग, 18 अक्टूबर को रवि योग, अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग, 19 अक्टूबर को रवि योग, 20 अक्टूबर को रवि योग है।

घट स्थापना मुहूर्त

वृश्चिक लग्न – प्रातः 8.27 बजे से 10.42 बजे l

अभिजित मुहूर्त – प्रातः 11.36 से 12.24 बजे l

कुंभ लग्न – दोपहर 2.35 बजे से 4.10 बजे l

वृषभ लग्न – रात्रि 7.24 बजे से 9.23 बजे

आज लगाएं दूध की मिठाई का भोग

नवरात्र के पहले दिन 15 अक्टूबर को प्रतिपदा तिथि पर मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। माता को भोग में दूध से बने व्यंजनों का भोग अर्पित करना चाहिए।

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