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कौन बनेगा मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री भाजपा ने सभी वर्गों के लिए खोले द्वार

भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही इन दिनों एक ही प्रश्न गूंज रहा है कौन बनेगा मुख्यमंत्री, किसकी बनेगी सरकार। इसका जवाब तो चुनाव के बाद ही मिलेगा। फिलहाल सतारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने कोई स्थानीय नाम घोषित नहीं किया है। मुख्यमंत्री की प्रतिस्पर्धा के लिए सभी वर्गों के द्वार टिकट वितरण की सोशल इंजीनियरिंग से खोल दिए हैं।

बड़े चेहरों पर अंचलवार दांव

पार्टी के बड़े चेहरों पर अंचलवार दांव लगाकर मुकाबला रोचक बना दिया है। एससी-एसटी, ओबीसी और सवर्ण वर्ग के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल बना हुआ है। दरअसल, भाजपा ने दिग्गजों के जरिए ऐसा संदेश दिया कि संबंधित वर्ग अपने-अपने वर्ग के ज्यादा से ज्यादा प्रत्याशी को चुनाव जिताएं और अपने वर्ग का मुख्यमंत्री बनवाएं।

आदिवासी वोट बैंक पर नजर

केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को भाजपा ने इस बार विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया है। सत्ता में वापसी के लिए आदिवासी वोटबैंक की भाजपा को बेहद आवश्यकता है। यही वजह है कि भाजपा के लिए कुलस्ते ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं। कुलस्ते जैसे बड़े कद के नेता के विधानसभा चुनाव लड़ने मात्र की खबर ने आदिवासियों की इच्छा को पंख लगा दिए हैं। प्रदेश में आदिवासी वर्ग के लिए 47 सीटें तो सुरक्षित हैं और 35 अन्य सीटों पर भी आदिवासी वोट निर्णायक स्थिति में हैं।

40 वर्षों से आदिवासी मुख्‍यमंत्री की मांग

मप्र में आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग 40 वर्षों से चली आ रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे कुलस्ते को विधानसभा चुनाव में उतारने से आदिवासी वर्ग भी इसे अवसर के रूप में ले सकता है। वहीं, ओबीसी वर्ग से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रहलाद पटेल भी विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों चेहरों को आगे कर भाजपा ने ओबीसी वर्ग के लिए भी संदेश दिया कि भाजपा ही उनकी हितैषी पार्टी है।

230 में से 127 भाजपा विधायक

गौरतलब है कि मप्र विधानसभा की मौजूदा स्थिति में कुल 230 में से 127 भाजपा विधायक हैं और इनमें से ओबीसी विधायकों की संख्या 54 है। मप्र राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के दावे के अनुसार मप्र में ओबीसी मतदाता की संख्या 48 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए 35 सीटें आरक्षित हैं। इसी आधार पर भाजपा ने अजा राष्ट्रीय मोर्चे के अध्यक्ष लाल सिंह आर्य को भी प्रत्याशी बनाया है।

कैलाश विजयवर्गीय को भी मैदान में उतारा

वैश्य वर्ग से कैलाश विजयवर्गीय को भी पार्टी राष्ट्रीय राजनीति के परिदृश्य से वापस लाकर एक बार फिर विधानसभा चुनाव लड़ा रही है। विजयवर्गीय भी सीएम पद के दावेदार रहे हैं। मालवांचल में उनका प्रभाव भी है। ग्वालियर- चंबल और राजपूत वर्ग का समर्थन पाने के लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं, महाकोशल से जबलपुर सांसद राकेश सिंह को विधानसभा चुनाव में भी इसी संदेश के साथ उतारा गया है कि हमेशा राजनीतिक नेतृत्व से वंचित रहे महाकोशल को इस बार अवसर मिल सकता है।

इनका कहना है

भाजपा ने सर्वस्पर्शी विस्तार किया है। सभी वर्ग और संभी अंचलों में पार्टी का मजबूत नेतृत्व खड़ा है। स्पष्ट तौर पर समाज के सभी वर्ग यह महसूस कर रहे हैं कि चुनाव में उन्हें भरपूर मौका मिला है और आने वाली सरकार में सभी वर्गों की मजबूत सहभागिता होगी। स्वाभाविक रूप से सभी वर्गों का समर्थन भी भाजपा को मिलेगा।

-डा दीपक विजयवर्गीय, वरिष्ठ नेता भाजपा

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