Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
PM मोदी का 76वां जन्मदिन आज, बोले आशीर्वाद सेवा का संकल्प मजबूत करता है BRICS Summit 2026: भारत के लिए कितना अहम है यह शिखर सम्मेलन? जानिए समूह से जुड़ी जरूरी बातें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹8,000 से बढ़कर ₹12,000 प्रतिमाह: UP सरकार का बड़ा ऐलान राजस्थान निकाय चुनाव 2026: 9 और 11 सितंबर को मतदान, 14 सितंबर को आएंगे नतीजे चोरी के डर से छत पर चढ़ा दी Scorpio! गोपालगंज में क्रेन से दो मंजिल ऊपर पहुंचाई SUV सड़क बनेगी तो धंसेगी, धंसेगी तो बनेगी: केशव मौर्य इंडोनेशिया में माउंट अनाक क्राकाटाऊ में जोरदार विस्फोट, 50,000 फीट तक पहुंचा राख का गुबार भारत के राष्ट्रपति ने शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। Happy Teachers Day 2026: शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है? जानें इतिहास और महत्व शुभ जन्माष्टमी: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर देशभर में भक्ति और उल्लास

क्यूआर कोड स्कैन करते ही बनेगी ओपीडी पर्ची, यह एप करना होगा लोड

जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कालेज के अस्पताल की ओपीडी के टोकन से लेकर जांच रिपोर्ट तक अब डिजीटल हो गई है। ना तो रोगी को जांच कराने के लिए पर्ची बनवाने की जरूरत है और ना ही भर्ती होने के लिए पर्चा। यहां तक पैथोलाजी जांच की रिपोर्ट भी अब रोगी के मोबाइल पर मिलने लगी है। यह पूरी आनलाइन व्यवस्था आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन यानी आभा एप (एबीएच) से जुड़ने पर मिल रही है। यदि रोगी के स्मार्टफोन में आभा एप डाउनलोड है तो ओपीडी काउंटर पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही स्वत: उसकी ओपीडी पर्ची तैयार हो रही है।

रोगी के स्मार्टफोन पर ही उसकी स्वास्थ्य की कुंडली रहेगी

 

ओपीडी जांच से लेकर आवश्यक जांच रिपोर्ट भी आनलाइन भेजे जाने की व्यवस्था से अब रोगी के स्मार्टफोन पर ही उसकी स्वास्थ्य की कुंडली रहेगी। स्वास्थ्य संबंधी विवरण के मरीज के पास उपलब्ध रहने से चिकित्सक के लिए बेहतर उपचार देना संभव होगा। हालांकि रोगियों के लिए आरंभ की गई नई सुविधा में अभी सर्वर की तकनीकी समस्या बाधा उत्पन्न कर रही है। इससे कुछ रोगियों को परेशान भी होना पड़ रहा है।

 

ऐसी है नई व्यवस्था…

पहली बार में लग रहा अधिक समय

 

क्यूआर कोड की व्यवस्था ओपीडी काउंटर में रोगियों की पंक्ति कम करने के लिए की गई है, लेकिन अभी हो उल्टा रहा है। जांच कराने के लिए आने वाले रोगियों की आभा आइडी नहीं है। इनके फोन पर आभा एप डाउनलोड करने में ही 10-15 मिनट लग जाते हैं। आनलाइन पंजीयन के दौरान लिंक बार-बार टूट रहा है।

 

आधार आधारित है यह व्यवस्था

 

विशेषज्ञों के अनुसार एप से जुड़ी व्यवस्था आधार-यूआइएन आधारित है। कई गरीब रोगियों के पास स्मार्टफोन नहीं है। कुछ के स्वजन के फोन नंबर रहते हैं, लेकिन इन्हें भी उपचार की सुविधा है। इसके लिए रोगी का आधार नंबर होना आवश्यक है। मोबाइल नंबर नहीं होने पर भी यूआइएन के आधार पर उसकी आभा आइडी बनाई जा सकती है।

 

आनलाइन व आफलाइन काउंटर

 

मेडिकल अस्पताल के साथ ही कैंसर और सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल में भी आभा एप से ओपीडी एवं आइपीडी पंजीयन आरंभ है। वर्तमान में रोगियों की सुविधा के लिए आनलाइन के साथ ही आफलाइन काउंटर भी रखे गए हैं। बिना मोबाइल फोन वाले रोगी का आधार लेकर काउंटर से ओपीडी पर्ची का प्रिंट लिया जा रहा है। ऐसे रोगियों की सहायता के लिए कर्मचारी भी नियुक्त किए गए है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.