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गुजरात में मजदूरों की पगार तो अच्छी, किंतु किसी हादसे में मजदूर की मौत के बाद सहयोग नहीं

पिटोल। गत दिनों गुजरात के ढोलक में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में हुई पांच लोगों की मौत जिसमें एक ही परिवार के चार लोगों की मौत के बाद शुक्रवार को समीपस्थ ग्राम घाटीया में मृतकों के परिवार की एक रस्म में शामिल हुए।

क्षैत्रिय विधायक विक्रांत भूरिया से ग्रामीणों ने कहा कि गरीबी की ओर बेरोजगारी की हालत में उनके परिवार गुजरात जाते है। किंतु किसी प्रकार के हादसे के शिकार होने पर वहां उन्हें किसी प्रकार की कोई सरकारी मदद नहीं मिलती।

उन्होंने ने कहा कि यहां तक कि इस दर्दनाक हादसे के बाद मृतकों के शवों को घर तक लाने के लिए वहां की पुलिस ने उन्हें कोई मदद नहीं की। बल्कि एक निजी वाहन आयसर के मालिक के नंबर दिए जिसने उनसे 17 हजार रुपए लिए ओर गुजरात व मप्र की सीमा पर पिटोल छोड़ कर चला गया।
मदद के नाम पर उन्हें अब तक 5 हजार प्रति मृतक अंत्येष्टि के लिए मुख्यमंत्री संबल योजना के तहत मिले है। किंतु कोई बडी मदद नहीं मिली है।
स्वजनो के साथ ग्रामीणों को भी आस है कि उन्हें कोई बड़ी आर्थिक सरकारी मदद मिल जाए। जिससे उनके बच्चो व पत्नि को जीवन यापन में सहारा मिल सके। गुजरात सरकार की जिम्मेदारी विधायक विक्रांत ने मृतक के स्वजनों से चर्चा की स्वजनो के आंसु छलक पडे
भावुक हुए विधायक विक्रांत ने कहा कि यह गुजरात सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि इस प्रकार के किसी भी हादसे में जिले से मजदूरी पर गुजरात जाने वाले गरीब मजदूरों को आधार पर ही कम से कम ये मदद कर दे की मृतक का शव सम्मान से उसके घर तक पहुंच सके।
विधायक ने कहा कि जिले में रोजगार के अभाव में जिले का आदिवासी मजदूर मजबूरी में काम पर अन्यत्र जाता है। कोई शौक से नहीं। मौके से उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को यथा शीघ्र संबल योजना का लाभ दिलवाने के लिए निर्देशित किया। गौरतलब है कि किसी भी प्रकार की दुर्घटना में मृत होने वाले श्रमिक को संबल योजना में 4 लाख रूपए की सहायता राशि दी जाती है।
एक हजार किमी दूर से लाए शव पहले सड़क हादसे में ढोलका में हाईवे पर बीच रास्ते में खड़े एक डम्पर में रात के अंधेरे में मजदूरों से भरी बोलेरो जा घूसी मौके पर ही पांच लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में घाटीया के दिलिप पुत्र नानसिंह, नितेश पुत्र नानसिंह, राहुल पुत्र खुमसिंह बिलवाल व प्रमोद पुत्र भारत बिलवाल निवासी घाटीया ओर पीपलरपाडा के रायचंद भुरिया की मौत हो गई थी।
दो अन्य गंभीर घायल भी हुए थे। दूसरे इधर घाटीया में चार शवो की राख ठंडी भी नहीं पड़ी थी की घाटीया से सटे गांव नागनखेडी के मजदूरी पर गए। दो युवकों की यूपी के प्रयागराज में माजु रमसु की ट्रेन से कट जाने पर मौत हो गई। ये रेलवे का काम करने वहां गए थे। जिनके शव पोटली में बांधकर एक हजार किमी दूर यहां घर पर लाने पडे़।

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