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परिवार, धैर्य और पढ़ाई-लिखाई…मनीष सिसोदिया ने बताया तिहाड़ जेल ने क्या-क्या सिखाया

दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को टीवी9 भारतवर्ष के साथ खास बातचीत की, 5 संपादकों के साथ आयोजित इस इंटरव्यू में मनीष सिसोदिया ने बताया कि जेल में उनका समय कैसा गुजरा, जेल ने उन्हें क्या-क्या सिखाया.

डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पिछले 17 महीने से कथित शराब घोटाला मामले में जेल में थे, जिसके बाद 9 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बड़ी राहत दी और वो पूरे जोश के साथ जेल से बाहर आए और एक बार फिर पार्टी का मोर्चा संभाला.

जेल में कैसा गुजरता था समय?

अपने इंटरव्यू में बात करते हुए सबसे पहले पूर्व डिप्टी सीएम ने बताया कि तिहाड़ जेल में पूरे 17 महीने उनके कैसे गुजरे, उन्होंने बताया कि जेल ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया. जब मनीष सिसोदिया से सवाल पूछा गया कि जेल में आपका संघर्ष कैसा था, कैसे दिन गुजरता था, तो सिसोदिया ने बताया कि, मैं जेल से बाहर था तो रोज स्कूल जाता था , रोज टीचर्स से बात करता था, मैं अपनी टीम के साथ स्कूल में शिक्षा अगले 5-10 साल में कैसे प्रोग्रेस करेगी इस पर चर्चा करता था,लेकिन फिर अचानक इस सारी दिनचर्या से हट कर मैं जेल में था. सिसोदिया ने कहा, जेल जाना अचानक से मेरी जिंदगी में बहुत बड़ा मोड़ था.

लिखने-पढ़ने का काम किया

मनीष सिसोदिया ने कहा मेरे पास बहुत सारी किताबें थी मैंने जेल में किताबें पढ़ना शुरू किया, जेल में लिखने-पढ़ने का काम करता रहा. उन्होंने कहा, मेरे पास दो ऑप्शन थे, इस सत्य को स्वीकार करके कि मैं जेल में हूं, मैं समय का सदुपयोग करूं या यह सोचता रहूं कि मैं जेल क्यों आ गया, मेरे साथ क्या हो गया. तो मैंने उसको किनारे कर दिया. फिर मैंने समय का सदुपयोग शुरू किया. मैंने जेल में नोटबुक खरीद कर बहुत नोटस बनाए. उन्होंने कहा मैंने लिखते-लिखते 10 पेन खत्म होते हुए देखें हैं. मैंने अंदर काफी लिखा, काफी नोटस बनाए.

जेल ने मनीष सिसोदिया को क्या सिखाया

इस सवाल का जवाब देते हुए सिसोदिया ने कहा, जेल ने मुझे बहुत कुछ सिखाया. उन्होंने कहा सबसे बड़ी चीज जो जेल किसी भी आदमी को सिखा सकती है वो है धैर्य, जेल आपको धैर्य सिखाती है, जेल आपको सिखाती है कि हर चीज मोबाइल की स्पीड से नहीं होगी.

परिवार की अहमियत सिखी

मनीष सिसोदिया ने कहा, मैंने जेल में सिखा कि आपकी प्रतिष्ठा, तरक्की, कामयाबी सब कुछ एक वक्त में कम लगने लगता है और लगता है कि बस रिश्ते मिल जाए. परिवार रिश्ते इन सब की बहुत अहमियत समझी, रिश्ते,परिवार ही सब कुछ है. साथ ही उन्होंने कहा कई बार परिवार की काफी याद आती थी, लेकिन फिर याद आता था कि यह तो सत्य है कि मैं जेल में हूं.

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