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लाड़ली के हाथ पीले करने और बच्चों को अफसर बनाने का था सपना, आग ने उजाड़ दी दुनिया

ग्वालियर। लाड़ली के हाथ पीले करने और बच्चों को अफसर बनाने के लिए टिक्की का ठेला लगा पिता पाई-पाई जोड़कर उनकी जिंदगी संवारने की कोशिश में लगा था। इधर मां अपनी लाडो की शादी के सपने संजो रहीं थी, लेकिन काल के क्रूर हाथों ने उनकी सारी खुशियां छीन ली।

अब उन बच्चों के सारे सपने दुखों के पहाड़ तले दबकर मिट्टी हो गए हैं। जहां उनके सिर से मां-बाप का साया छिन गया। वहीं तीन बच्चे जिदंगी और मौत से जूझ रहे हैं। तीन को अब तक यह नहीं मालूम की उनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं है। साथ ही भाई बहन अस्पताल में दर्द की सिसकिंया भर रहे हैं।

शहर के सिंधिया नगर निवासी अवधेश प्रजापति, पत्नी रामबेटी, बेटी रेशमा, कुसमा और बेटा राजा 30 मार्च को आग से झुलस गए। इनको इलाज के लिए जेएएच की बर्न यूनिट में भर्ती किया गया। इलाज के दौरान अवधेश और पत्नी रामबेटी ने दमतोड़ दिया।

बेटी रेशमा, कुसमा और बेटा राजा बर्न यूनिट में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। डाक्टरों के मुताबिक उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। बर्न यूनिट में भर्ती इन बच्चों को अब तक यह नहीं पता कि इनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। बर्न यूनिट के पलंग पर लेटी बेटी रेशमा को जब भी जलन का अहसा होता है वह मां कहकर चीखने लगती है। परिवार बच्चों की तीमारदारी में लगा है, लेकिन उनके दर्द को समझने वाले उनके माता-पिता अब उनके पास नहीं है।

परिवार गरीब, लेकिन सुखी था

सिंधिया नगर में रहने वाले अवधेश टिक्की बनाकर बेचने का काम करते थे। परिवार में तीन बेटा और तीन बेटी हैं। लेकिन आज यह अनाथ हो चुके हैं। माता-पिता ने इनको पढ़ा लिखा कर अफसर बनाने का सपना संजोया था। हादसे में जान गंवा चुके अवधेश के पड़ोसी बताते हैं कि यह परिवार गरीब जरूर था, लेकिन सुखी था। परिवार अपनी आमदनी के हिसाब से खर्च कर शांतिपूर्ण जीवन बिता रहा था। लेकिन, हादसे के चलते अब इन बच्चों का भविष्य संकट में आ गया है।

हादसे के पांच दिन पहले गांव गए थे तीन मासूम

हादसे से पांच दिन पहले तीन मासूम अपने दादा के साथ गांव चले गए थे। इसलिए वह हादसे का शिकार होने से बच गए। दरअसल बच्चे गांव में रहकर दादा-दादी के पास प्रायमरी कक्षा में पढ़ते थे। बच्चे घर लौटते उससे पहले ही यह हादसा हो गया और उनके माता-पिता उनको छोड़ चले गए। दादा दादी के पास रह रहे बच्चों को अब तक नहीं मालूम की उनके माता-पिता अब उनको दुलार नहीं कर सकेंगे।

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