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सूखा, बाढ़ और तंबाकू इल्ली के प्रकोप से फसलें प्रभावित, कम मिल रही पैदावार

हरदा। जिले में इस साल भी अधिकांश गांवों में सोयाबीन की पैदावार किसानों की उम्मीद अनुसार नहीं हुआ है। स्थिति यह है कि कई किसानों की तो लागत भी निकलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में उन्हें आगामी रबी सीजन की बोवनी करने में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

किसानों ने बताया कि पहले करीब पच्चीस दिनों तक सूखा पड़ गया। अगस्त माह में बने इस हालात से सोयाबीन की फसल काफी प्रभावित हो गई। इसके बाद बारिश का दौर शुरू हुआ। कभी अति बारिश तो कभी बाढ़ ने नदी और नालों के किनारे खेतों की सोयाबीन बर्बाद कर दी। यह स्थिति सामरधा, कड़ौला, नीमगांव, नहालखेड़ा आदि गांवों में बनी।

किसान अनिल सारन ने बताया कि उनकी मक्का फसल प्रभावित हो गई है। उन्हें उम्मीद थी कि प्रति एकड़ बीस क्विंटल का पैदावार होगी, लेकिन बमुश्किल दस क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार मिलना भी कठिन लग रहा है। आने वाले कुछ दिनों में मक्का की फसल की कटाई शुरू हो जाएगी। अन्य किसानों का भी कहना था कि फसल जिस तरह शुरुआत में अच्छी लगी थी बाद में वैसी नहीं रही। सूखा, अतिवृष्टि और बाढ़ ने सब बर्बाद कर दिया। ऐसे में लागत के अनुसार उत्पादन मिलना भी मुश्किल हो गया है।

दाना हो गया पतला

सोयाबीन फसल का दाना पतला हो गया है। खमलाय के किसान प्रशांक पटेल ने बताया कि सूखा पड़ने से सोयाबीन का दाना पतला हो गया है। वर्षा हुई जरूर लेकिन समय निकल जाने के बाद। अब सोयाबीन की फसल कटाई चल रही है। आसपास किसानों को तीन से चार क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार मिल रही है, जो काफी कम है। किसान ने बताया कि मजदूरों की मदद से सोयाबीन की कटाई कराई जा रही है। कुछ दिन पूर्व हुई वर्षा के कारण खेतों में अधिक नमी बनी हुई है। इस कारण हार्वेस्टर से कटाई अभी भी संभव नहीं दिख रही है।

उन्होने बताया कि मजदूरों की भी कमी है। मजदूर मिल रहे हैं, लेकिन मजदूरी साढे तीन सौ से लेकर कहीं कहीं चार सौ रुपये प्रति मजदूर भी है। ऐसे में किसान परेशान हो रहा है।

तंबाकू इल्ली से भी हुआ नुकसान

किसानों ने बताया कि सूखा की स्थिति में फसल लंबे समय तक रही। इस कारण तंबाकू इल्ली का प्रकोप भी हुआ। कई खेतों में पूरी तरह नुकसान हुआ तो कहीं फसल के पत्ते चट करने के बाद फलियों पर असर हुआ। सामरधा के किसान नवीन सारन ने बताया कि सोयाबीन फसल में इल्लियां इतनी अधिक लगी कि फलियों को नुकसान पहुंच गया है। उनके दस एकड़ के प्लाट में भी व्यापक नुकसान हुआ है।

अभी विभागीय स्तर से सोयाबीन या अन्य किसी फसल के पैदावार की जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। जानकारी प्राप्त होने पर ही पता चल पाएगा कि फसलों का उत्पादन कैसा प्राप्त हो रहा है। -अखिलेश पटेल, एडीओ, कृषि विभाग हरदा।

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