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2015 से कह रहे, लेकिन केजरीवाल ने अब तक नहीं लगाई यमुना में डुबकी, दिल्ली प्रदूषण को लेकर BJP हमलावर

ठंड आते ही उत्तर भारत में वायु प्रदूषण का असर दिखने लगा है. प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर राजधानी दिल्ली में देखने को मिल रहा है, जहां करीब 3 करोड़ से अधिक लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं. बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “मुझे इस प्रदूषण से पिछले पांच दिनों से गला खराब है. मैं दवाईयां ले रहा हूं, ताकि मैं इस जानलेवा प्रदूषण में जिंदा रहूं.” उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश अध्यक्ष विरेंद्र सचदेवा की तबीयत खराब होने के लिए केजरीवाल जिम्मेदार हैं. प्रवक्ता ने आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल पर तंज कसते हुए कहा कि ये यमुना में डुबकी लगाने की बात कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्होंने डुबकी नहीं लगाई. आगे उन्होंने कहा, “मैं केजरीवाल को ओपन चैलेंज देता हूं कि पिछले 24 घंटे में यमुना में डुबकी लगाकर दिखाएं.”

प्रवक्ता ने कहा कि केजरीवाल डुबकी इसलिए नहीं लगा रहे हैं क्योंकि नदी अब गंदी हो गई है. उन्होंने कहा कि प्रदूषण के कारण नदी की स्थिति खराब हो गई है. उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल अपने बड़े बंगले में 40 प्यूरिफायर लगा सकते हैं, लेकिन झुग्गियों में रहने वाले लोगों का क्या होगा, इसका उन्हें कोई अंदाजा नहीं है.

शीश महल की जगह झुग्गी झोपड़ियों में रहकर दिखाएं

आगे उन्होंने कहा, “अगर केजरीवाल को लगता है कि उन्होंने दिल्ली की हवा को सही किया है, तो आप बिना मास्क के घूमकर दिखाइए.” उन्होंने कहा “अगर उन्हें लगता है कि उन्होंने वाकई में प्रदूषण पर कोई काम किया है, तो अपने शीश महल के बजाय झुग्गी झोपड़ियों में एक हफ्ते रहकर दिखाइए.” उन्होंने कहा कि वे ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि उन्होंने दिल्ली में सिर्फ कुकर्म किए हैं. वहीं दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने इससे निपटने के लिए शनिवार को एक बैठक की. इस बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र यादव, और पड़ोसी राज्यों के पर्यावरण मंत्री भी मौजूद थे. बैठक का उद्देश्य दिल्ली में बिगड़ती हवा की गुणवत्ता का आकलन करना और उसका समाधान निकालना था.

पर्यावरण मंत्री ने इस बैठक में देरी पर चिंता व्यक्त की और कहा, “पिछले साल अगस्त में इसी तरह की बैठक हुई थी. जिससे हमें रणनीति बनाने के लिए अधिक समय मिल गया था. इस साल की बैठक अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में हुई. अगर यह तीन महीने पहले आयोजित की जाती, तो हम प्रदूषण की समस्या से अधिक प्रभावी ढंग से निपट सकते थे.”

तीन महीनों तक गैस चैंबर रहेगा दिल्ली

गौरतलब है कि दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही लोग करीब तीन महीने तक एक तरह के गैस चैंबर में जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हो जाते हैं। इसका सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों पर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली के प्रदूषण पर कई बार अपनी नाराजगी जताई है। केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारें प्रदूषण को खत्म करने के अलग-अलग दावे पेश करती हैं, लेकिन इससे प्रदूषण के स्तर में कोई बड़ी राहत नहीं मिल पाई है।

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